कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र में सोमवार सुबह हाथियों के झुंड ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जमकर उत्पात मचाया। श्री सिद्धबली मंदिर के समीप हाईवे पर पहुंचे हाथियों के झुंड ने दो वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और वाहनों की लंबी कतार लग गई।

जानकारी के अनुसार, कोटद्वार और आसपास के इलाकों में रविवार शाम को हुई भारी बारिश के कारण खोह नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। नदी में पानी बढ़ने के बाद हाथियों का एक झुंड रास्ते में फंस गया। झुंड में छोटे हाथी भी शामिल थे, जो नदी पार नहीं कर पा रहे थे।

बताया जा रहा है कि हाथियों का यह झुंड रविवार रात से ही राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास घूम रहा था। वन क्षेत्र से निकलकर आए हाथी नदी पार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पानी का तेज बहाव होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके।

सोमवार सुबह जब हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो सड़क पर हाथियों का झुंड मौजूद था। पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतार लग गई। वाहन चालक दूर खड़े होकर हाथियों के हटने का इंतजार करने लगे।

इसी दौरान झुंड में शामिल एक हथिनी ने अचानक आक्रामक व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि हथिनी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क थी। उसने दो वाहनों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों वाहनों को नुकसान पहुंचा।

घटना के बाद वाहन चालकों में डर का माहौल बन गया। लोगों ने अपने वाहन पीछे हटाए और सुरक्षित दूरी बना ली। मौके पर मौजूद लोगों ने वन विभाग और पुलिस को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे हाथियों के करीब न जाएं और किसी तरह की छेड़छाड़ करने से बचें।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथियों का व्यवहार उनके प्राकृतिक परिवेश और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जब झुंड में छोटे बच्चे होते हैं तो हथिनी उनकी सुरक्षा को लेकर अधिक संवेदनशील हो जाती है और खतरा महसूस होने पर हमला कर सकती है।

वन कर्मियों ने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी। टीम ने हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने के प्रयास शुरू किए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में अक्सर हाथियों की आवाजाही देखने को मिलती है। बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने और जंगलों में बदलाव के कारण कई बार वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों या सड़कों तक पहुंच जाते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों के रास्ते में आने की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जाती है। लोगों को भी वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी बेहद संवेदनशील और सामाजिक जीव होते हैं। खासकर मादा हाथी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहती हैं। ऐसे में जब कोई वाहन या व्यक्ति उनके करीब पहुंचता है तो वे खतरा महसूस कर सकती हैं।

घटना के कारण हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि वन विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया गया।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वन क्षेत्रों और हाथी गलियारों के आसपास यात्रा करते समय सावधानी बरतें। वन्यजीवों को देखकर वाहन रोककर उनके करीब जाने या फोटो-वीडियो बनाने से बचें।

कोटद्वार क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। यह इलाका जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों से घिरा हुआ है, जिसके कारण कई बार हाथी भोजन और सुरक्षित रास्ते की तलाश में मानव आबादी और सड़कों तक पहुंच जाते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने ला दिया है। वन विभाग के लिए जहां वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी है, वहीं लोगों और यात्रियों की सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी है।

फिलहाल वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाथियों के झुंड को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने लोगों से संयम बरतने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।

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