25 लाख की Cyber ठगी का खुलासा, बंगाल से अंतरराज्यीय गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार

Update: 2026-06-22 12:19 GMT

Uttarakhand उत्तराखंड : साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच देहरादून पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए करीब 25 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो सदस्यों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तपन बिस्वास (45) और उत्तम कुमार दास (38) के रूप में हुई है, जो उत्तर 24 परगना जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरा मामला एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिसमें तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर पीड़ित के साथ बड़ी धोखाधड़ी की गई। मामले की शुरुआत तब हुई जब देहरादून निवासी एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि उसके साथ ऑनलाइन ठगी हुई है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने पहले उसका मोबाइल फोन हैक किया और फिर धीरे-धीरे उसके डिजिटल अकाउंट्स पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके बाद ठगों ने न केवल उसकी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर बदल दिए, बल्कि उसकी कंपनी के बैंक खाते से लगभग 24.95 लाख रुपये की बड़ी रकम भी अवैध रूप से निकाल ली।

इस गंभीर मामले की शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ और साइबर सेल की संयुक्त टीम को जांच में लगाया गया, ताकि तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर ठगी की परतें खोली जा सकें।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा और बैंकिंग गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसी आधार पर पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए यह स्पष्ट हुआ कि इस साइबर ठगी के पीछे पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से संचालित एक संगठित गिरोह सक्रिय है।

इसके बाद पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल में दबिश दी और दोनों आरोपियों तपन बिस्वास और उत्तम कुमार दास को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि यह गिरोह साइबर फ्रॉड के लिए फिशिंग, मोबाइल हैकिंग और ई-मेल अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पहले पीड़ित के मोबाइल और ई-मेल अकाउंट की जानकारी हासिल करते थे और फिर उसे हैक कर बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद वे खाते से बड़ी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे ताकि पैसे की ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि यह गिरोह केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुका हो सकता है। इस संभावना को देखते हुए जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और पैसे को आगे कहां-कहां ट्रांसफर किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों का यह तरीका बेहद सुनियोजित और तकनीकी रूप से उन्नत था, जिसमें पीड़ित को तुरंत कोई शक न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता था। इसी वजह से कई मामलों में लोग समय पर ठगी का पता नहीं लगा पाते।

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने मोबाइल, ई-मेल और बैंकिंग खातों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और समय-समय पर अपने पासवर्ड बदलते रहें।

साइबर क्राइम पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो लंबे समय से ऑनलाइन ठगी में सक्रिय था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

कुल मिलाकर, यह मामला साइबर अपराध की गंभीरता को एक बार फिर उजागर करता है और दिखाता है कि किस तरह तकनीक का गलत इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी की जा रही है।

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