देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को कांग्रेस पर चुनावी हार का दोष संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ने और जनादेश का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार दोनों को स्वीकार करना चाहिए और मतदाता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

बलवीर रोड स्थित प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आज पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में राज्य में पार्टी का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण 22 अक्टूबर से पांच नवंबर तक और दूसरा चरण 11 से 30 नवंबर तक चलेगा। इसके तहत 31 अक्टूबर को श्रीनगर (गढ़वाल), दो नवंबर को देहरादून और तीन नवंबर को रुद्रपुर में पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद प्रदेश के सभी 13 जिलों में पदयात्राएं निकाली जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में दो नवंबर को होने वाली पदयात्रा में 10 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से जनता को केंद्र सरकार के कार्यों, देश की प्रगति और महिलाओं, युवाओं, गरीबों, वंचित वर्गों तथा सैनिकों के लिए किए गए फैसलों की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर चुनाव में हार के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) तथा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक दल की जीत की गारंटी नहीं है, बल्कि इसमें अंतिम निर्णय मतदाता का होता है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म पिथौरागढ़ में हुआ, उन्होंने खटीमा में पढ़ाई की और बाद में चंपावत से विधायक बने। वर्तमान में देहरादून में रहने के बावजूद उनका मतदाता पंजीकरण खटीमा में है।

उन्होंने कहा कि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाता नामों को हटाकर सही स्थान पर नाम बनाए रखने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विवाह के बाद दूसरे शहर में रहने वाली महिला का मतदाता पंजीकरण भी उसके नए निवास स्थान के अनुसार होना चाहिए।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी को अपनी चुनावी असफलताओं के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की लंबे समय से सत्ता से दूरी का उल्लेख करते हुए कहा कि हर हार के लिए चुनाव व्यवस्था को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

धामी ने कहा कि संविधान का सम्मान केवल उसे हाथ में लेकर चलने से नहीं, बल्कि उसके अनुरूप आचरण करने से होता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर राजनीतिक विरोध के दौरान संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का ध्यान नहीं रखने का आरोप लगाया। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रीय निर्माण में लगाने और उन्हें अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

युवाओं तक पहुंचने के लिए परिणामों पर जोर

विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों तक पहुंचने की रणनीति से जुड़े सवाल पर धामी ने कहा कि विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक के विद्यार्थी समझदार हैं और केवल बातों से प्रभावित नहीं होते, बल्कि परिणाम देखते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार जनता के बीच जाकर अपने पांच साल के कार्यकाल में किए गए कार्यों, उपलब्धियों और प्रयासों की जानकारी देगी। सरकार अपने कामकाज के आधार पर जनता के बीच जाएगी।

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