देहरादून। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस की शंखनाद रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धीकरण विवाद अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस मामले को दोबारा उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में छुआछूत जैसी कोई बात नहीं है और राज्य की संस्कृति सभी को साथ लेकर चलने की रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बेवजह ऐसे मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया मुद्दा

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की हल्द्वानी रामलीला मैदान में 8 अगस्त को शंखनाद रैली आयोजित की गई थी।

रैली के बाद परिसर के कथित शुद्धीकरण को लेकर विवाद शुरू हुआ था। कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल उठाए थे।

शनिवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे का जिक्र करते हुए इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़ने की कोशिश की।

इसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई।

सीएम धामी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तराखंड में समाज के सभी वर्गों को सम्मान दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने हमेशा सभी को अपनाया है और यहां छुआछूत जैसी सोच के लिए कोई जगह नहीं है।

सीएम धामी ने कहा कि आज सनातन संस्कृति का प्रभाव पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है, लेकिन कांग्रेस इस तरह के मुद्दों को उठाकर समाज में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है।

‘विपक्ष मुद्दाविहीन हो गया है’

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह ऐसे विषयों को तूल दे रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के लिए जातिवाद और छुआछूत जैसे मुद्दों को सामने ला रही है।

धामी ने कहा कि वर्तमान उत्तराखंड में समाज के सभी लोग मिलकर आगे बढ़ रहे हैं और राज्य की परंपरा हमेशा समरसता की रही है।

कांग्रेस ने जताई थी आपत्ति

कांग्रेस नेताओं ने रामलीला मैदान के शुद्धीकरण को लेकर सवाल उठाए थे।

उनका आरोप था कि इस तरह की कार्रवाई सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाती है।

कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान सभी लोगों के लिए समान होते हैं और वहां किसी प्रकार के भेदभाव की भावना नहीं होनी चाहिए।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस विवाद के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।

भाजपा जहां कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे सामाजिक समानता से जुड़ा विषय बता रही है।

दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी के कारण यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

उत्तराखंड की सामाजिक परंपरा का दिया हवाला

मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में उत्तराखंड की सामाजिक परंपराओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति हमेशा समरसता और एकजुटता की रही है।

उन्होंने दावा किया कि यहां समाज के सभी वर्ग मिलकर रहते हैं और किसी भी तरह के भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जाता।

आगे भी जारी रह सकती है सियासत

रामलीला मैदान शुद्धीकरण विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन गया है।

आने वाले दिनों में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल मुख्यमंत्री धामी के पलटवार के बाद विवाद फिर से गरमा गया है और दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रखने में जुटे हैं।

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