विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर जरूरी: राज्यपाल
बच्चों को दया के बजाय सम्मान और अवसर देने का संदेश: राज्यपाल
देहरादून: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने मंगलवार को देहरादून स्थित आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल में आयोजित “विशिष्ट अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया) व ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के मैपिंग अभियान” का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर चाहिए।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में कहा कि किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी कमी नहीं, बल्कि उसकी विशेष आवश्यकता के रूप में समझना होगा। किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी पहचान मत बनाइए, उसकी क्षमता को उसकी पहचान बनाइए। उन्होंने समावेशी, संवेदनशील और अवसरों से परिपूर्ण उत्तराखण्ड के निर्माण का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मैपिंग अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की समय पर पहचान कर उसे उचित परामर्श, विशेषज्ञ सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक की सदी है। हम इन तकनीकों के जरिए दिव्यांग बच्चों को सहायता और कई अवसर प्रदान कर सकते हैं।
राज्यपाल गुरमीत ने कहा कि परिवार, विद्यालय, विशेषज्ञ और प्रशासन के समन्वित प्रयासों से ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मजबूत सहयोग तंत्र विकसित किया जा सकता है। पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी समय पर विशेषज्ञ सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए 200 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों की क्षमता पहचानकर उनके विकास को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।
पूर्व सांसद एवं डिस्लेक्सिया सोसायटी उत्तराखण्ड के अध्यक्ष तरुण विजय ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की पहचान, शिक्षा, उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने अभियान को प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में छात्र एवं शिक्षक उपस्थित थे।