चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अलकनंदा नदी पर हाट सियासैंण क्षेत्र में बन रही इस परियोजना की सुरंग में गुरुवार रात भारी भूस्खलन के बाद कई श्रमिक अंदर फंस गए थे। घटना के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जो पूरी रात चलता रहा।

शुक्रवार सुबह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमों से राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री धामी ने हादसे में घायल हुए श्रमिकों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं और बचाव कार्य में किसी भी तरह की कमी न छोड़ी जाए।

अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में अब तक सात श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं, 13 घायल श्रमिकों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। सुरंग के अंदर अभी भी तीन श्रमिकों के फंसे होने की जानकारी है, जिनकी तलाश के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

घटना के बाद सुरंग में मलबा भर जाने से बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं। राहत दल आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। सुरंग की स्थिति को देखते हुए बचाव कर्मी पूरी सावधानी के साथ अभियान चला रहे हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए थे। इसके बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हो गईं। आईटीबीपी और सेना के जवान भी बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं।

प्रशासन के मुताबिक, सुरंग में अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी आने के कारण यह हादसा हुआ। इससे वहां काम कर रहे श्रमिकों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया और कई लोग अंदर फंस गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सुरंग में फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

हादसे के बाद परियोजना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों की टीम भी मौके पर स्थिति का आकलन कर रही है ताकि बचाव कार्य को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के निर्माण के दौरान सुरंग का काम चल रहा था, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक तैनात थे।

सुरंग हादसे के बाद श्रमिकों के परिवारों में चिंता का माहौल है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है और घायलों के इलाज की व्यवस्था की गई है।

रेस्क्यू टीमों का कहना है कि सुरंग के अंदर की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। बचाव कर्मी लगातार मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान भूस्खलन और अचानक मलबा आने जैसी घटनाएं चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऐसे मामलों में बचाव कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

फिलहाल प्रशासन की नजर सुरंग में फंसे तीनों श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने पर है। मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव अभियान में तेजी लाई जाए और हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

चमोली टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, फिलहाल पूरा ध्यान राहत और बचाव अभियान पर केंद्रित है।

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