मसूरी: लंबे वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटकों के मसूरी पहुंचने का असर अब केवल ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं रहा। शहर में कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ी है और इसका दबाव मसूरी के साथ-साथ देहरादून की कूड़ा निस्तारण व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बीते एक सप्ताह में दून और मसूरी से निकलने वाले कचरे में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मसूरी में सामान्य ऑफ-सीजन के दौरान प्रतिदिन करीब 25 से 28 टन कचरा निकलता है। वर्तमान पर्यटन अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 38 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है। पीक टूरिस्ट सीजन में कचरे की मात्रा 46 से 48 टन प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। होटल, रेस्टोरेंट, बाजार और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बढ़ी भीड़ को इसके पीछे प्रमुख वजह माना जा रहा है।
तीन दिन के लंबे वीकेंड के दौरान मसूरी में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी थी। किंक्रेग, गांधी चौक, लाइब्रेरी बाजार और मसूरी-देहरादून मार्ग समेत कई हिस्सों में लंबा जाम लगा रहा। होटल और रेस्टोरेंट भी लगभग पैक रहे, जिससे शहर के सफाई और परिवहन संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। कचरा बढ़ने का असर देहरादून के शीशमबाड़ा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट पर भी पड़ा है। मसूरी से निकलने वाले कुल कचरे का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा प्रसंस्करण के लिए इस प्लांट तक पहुंचता है। नगर स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक हाल के दिनों में प्लांट पर अतिरिक्त भार जरूर बढ़ा है, हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई गई है। पर्यटन स्थलों, बाजारों और सार्वजनिक क्षेत्रों में खाने-पीने के सामान की पैकेजिंग, प्लास्टिक बोतलें और अन्य कचरा अधिक निकलने से सफाई कर्मचारियों के लिए चुनौती बढ़ गई है। बड़ी संख्या में पर्यटकों के एक साथ पहुंचने पर सामान्य दिनों के लिए बनाई गई कूड़ा उठान और निस्तारण व्यवस्था पर अचानक अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
पर्यटकों की भीड़ से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर पहले भी चिंता जताई गई है। देहरादून और मसूरी के आसपास जल स्रोतों के पास बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के कारण कचरा फेंकने और जल प्रदूषण की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार संवेदनशील इलाकों में बेहतर सफाई और निगरानी की जरूरत बताई है।
इस वीकेंड पर मसूरी की सड़कों पर भारी यातायात दबाव भी देखा गया। तीन दिवसीय छुट्टी के दौरान उत्तराखंड के कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों की ओर बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे, जिससे मसूरी समेत पहाड़ी मार्गों पर लंबी कतारें लग गईं। अब नगर निकायों के सामने चुनौती यह है कि पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखते हुए कचरा प्रबंधन की क्षमता भी बढ़ाई जाए। पीक सीजन में अतिरिक्त कूड़ा वाहन, सफाई कर्मचारी और समयबद्ध संग्रह व्यवस्था जैसे उपाय जरूरी माने जा रहे हैं, ताकि मसूरी की खूबसूरती और पर्यावरण पर बढ़ती भीड़ का नकारात्मक असर कम किया जा सके।
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