उत्तर प्रदेश : राजनीति में समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए PDA में ‘P’ की परिभाषा को लेकर तीखा तंज कसा है। योगी ने कहा कि पहले PDA में ‘P’ का मतलब पिछड़ा बताया गया, फिर इसे पंडित से जोड़ दिया गया और अब किसी दिन इसका मतलब पाकिस्तान भी बताया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान उस समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बहस तेज चल रही है। समाजवादी पार्टी ने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के समीकरण को अपनी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। वहीं, हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने PDA में ‘P’ को पंडित से जोड़ते हुए ब्राह्मण समाज को लेकर भी अपनी बात रखी थी।
योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के हिसाब से शब्दों के अर्थ बदलते रहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले पिछड़ों को जोड़ने की बात की गई और बाद में पंडितों को जोड़ने की कोशिश शुरू हो गई। योगी ने इसी बदलाव को लेकर अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाए।
दरअसल, अखिलेश यादव लगातार PDA को सामाजिक न्याय का मॉडल बताते रहे हैं। उनका कहना है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को उचित भागीदारी और सम्मान मिलना चाहिए। हाल ही में उन्होंने PDA के ‘P’ को पंडित से जोड़ते हुए ब्राह्मण समाज को भी इस समीकरण का हिस्सा बताया था।
बीजेपी ने अखिलेश यादव के इस बयान को लेकर हमला तेज कर दिया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि समाजवादी पार्टी चुनावी फायदे के लिए समय-समय पर अपने नारों और समीकरणों की परिभाषा बदलती रहती है। बीजेपी का कहना है कि जनता अब केवल जातीय राजनीति नहीं बल्कि विकास और सुशासन के मुद्दे पर फैसला करेगी।
वहीं, समाजवादी पार्टी का कहना है कि PDA केवल चुनावी नारा नहीं बल्कि समाज के वंचित वर्गों की आवाज है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसमें हर उस वर्ग को शामिल किया जा रहा है जिसे राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी की जरूरत है। अखिलेश यादव लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि बीजेपी सरकार में कई वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। बीजेपी जहां अपने विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को मुद्दा बना रही है, वहीं सपा PDA के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में PDA को लेकर बीजेपी और सपा के बीच जारी बहस केवल बयानबाजी नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है।
योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद अब सपा की ओर से भी पलटवार की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में PDA की परिभाषा और इसके राजनीतिक असर को लेकर यूपी की सियासत और गर्म हो सकती है।
फिलहाल ‘P’ की परिभाषा को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक लड़ाई उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में एक नया मुद्दा बन गई है। बीजेपी और सपा दोनों ही इस मुद्दे के जरिए अपने समर्थक वर्गों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।