प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों ने डीजे की तेज आवाज को बताया जिम्मेदार
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां प्रसव के कुछ समय बाद एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए मेरठ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर से गुजरे डीजे की तेज आवाज और धमक को उसकी तबीयत बिगड़ने से जोड़ते हुए आरोप लगाए हैं। हालांकि महिला की मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच और संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जानकारी के मुताबिक महिला को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव होने के बाद कुछ समय तक उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान अचानक महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उसे मेरठ के बड़े अस्पताल में रेफर करने का फैसला किया। परिजन महिला को लेकर मेरठ के लिए रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद परिवार में मातम पसर गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बाहर से एक डीजे गुजरा था। डीजे की आवाज और धमक काफी तेज थी। परिवार का दावा है कि इसी दौरान महिला की हालत बिगड़ गई। इसके बाद चिकित्सकों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। परिजनों ने डीजे की तेज आवाज को लेकर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
इस घटना के बाद अस्पताल के आसपास तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों के आसपास तेज आवाज से बचना चाहिए, क्योंकि यहां गंभीर मरीज, बुजुर्ग, नवजात बच्चे और प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रही महिलाएं भर्ती रहती हैं। तेज शोर से मरीजों को परेशानी हो सकती है।
हालांकि महिला की मौत सीधे डीजे की तेज आवाज के कारण हुई या इसके पीछे कोई चिकित्सकीय कारण था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रसव के बाद महिलाओं में कई तरह की गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में मौत के वास्तविक कारण के संबंध में डॉक्टरों की रिपोर्ट और जांच महत्वपूर्ण होगी। केवल परिजनों के आरोप के आधार पर डीजे की आवाज को मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।
बताया जा रहा है कि महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे मेरठ रेफर किया था। इसके बाद परिजन उसे लेकर निकले। रास्ते में महिला की हालत और गंभीर हो गई और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में बच्चे के जन्म की खुशी कुछ ही समय में मातम में बदल गई।
मामले में अस्पताल की ओर से महिला को दिए गए इलाज, प्रसव के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति और उसे रेफर किए जाने की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रसव के बाद महिला को कौन सी स्वास्थ्य समस्या हुई और किस स्थिति में उसे मेरठ भेजने का फैसला किया गया। चिकित्सकीय दस्तावेज और डॉक्टरों की राय सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं, अस्पताल के बाहर से डीजे गुजरने और तेज आवाज के आरोप ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की ओर भी ध्यान खींचा है। अस्पताल और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनावश्यक तेज आवाज मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे इलाकों में ध्वनि के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए नियम बनाए गए हैं। अब घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित स्थान पर डीजे किस स्तर की आवाज में बजाया जा रहा था और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था।
परिजनों के आरोपों की जांच होने पर यह भी सामने आ सकेगा कि डीजे गुजरने और महिला की तबीयत बिगड़ने के बीच वास्तव में कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय और महिला के इलाज से संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। यदि मामले में प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच कराई जाती है तो अस्पताल में उपलब्ध रिकॉर्ड, चिकित्सकों के बयान और अन्य परिस्थितियों के आधार पर तथ्य सामने आ सकते हैं।
घटना ने एक परिवार की खुशियों को गहरे दुख में बदल दिया। प्रसव के बाद जहां परिवार नए सदस्य के आगमन की खुशी मना रहा था, वहीं महिला की अचानक तबीयत बिगड़ने और फिर मौत की खबर से परिवार सदमे में आ गया। फिलहाल परिजनों ने डीजे की तेज आवाज को लेकर आरोप लगाए हैं, जबकि महिला की मौत के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।