महराजगंज: जिले के घुघली कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजने से दुकानों में नुकसान होने की शिकायत सामने आई है। व्यापारियों का आरोप है कि अत्यधिक आवाज और कंपन के कारण कांच की अलमारियां तथा सामान रखने के शेल्फ गिर गए। एक होम्योपैथिक दवाखाने में लगभग 300 दवाओं की शीशियां फर्श पर पड़ी मिलीं, जिनमें 40 से 50 टूट गई थीं। पुलिस ने नुकसान की वजह की जांच कराने की बात कही है। घटना के बाद व्यापारियों ने प्रशासन से ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की मांग की है। उनका कहना है कि उत्सव के दौरान बजने वाले डीजे की आवाज से आसपास के कारोबार और लोगों की सुविधा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हालांकि, दुकानों को हुए नुकसान और डीजे के कंपन के बीच संबंध की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।
दवाखाना खोला तो फर्श पर पड़ी मिलीं शीशियां
रेलवे ढाले के पास होम्योपैथिक दवाखाना चलाने वाले डॉ. अनुराग रुंगटा के अनुसार, गुरुवार शाम दवाखाना बंद करने के बाद वह घर चले गए थे। अगले दिन सुबह लौटने पर दवाओं की शीशियां नीचे गिरी मिलीं। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें चोरी की आशंका हुई, लेकिन बाद में उन्होंने नुकसान की वजह डीजे से पैदा हुए कंपन को बताया। 
जूते-चप्पल और घड़ी की दुकानों में भी नुकसान
मुख्य मार्ग पर दुकान चलाने वाले पंकज जायसवाल के यहां कांच के शेल्फ और उन पर रखे जूते-चप्पल गिरने की शिकायत सामने आई। डीएवी चौक पर अजीत रावत की घड़ी की दुकान में भी दीवार पर टंगी कुछ घड़ियों के कांच टूटे। दुकानदारों ने तेज आवाज तथा कंपन को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। अलग-अलग दुकानों से नुकसान की शिकायत आने के कारण मामला केवल एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहा। फिर भी कुल कितनी दुकानें प्रभावित हुईं और सभी का मिलाकर कितना आर्थिक नुकसान हुआ, इसका कोई समेकित आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक दुकान के नुकसान का आकलन अलग से करना होगा।
पुलिस को भेजे नुकसान के फोटो और वीडियो
दुकानदारों ने डायल 112 पर सूचना देने के साथ स्थानीय चौकी प्रभारी को भी घटना से अवगत कराया। नुकसान से संबंधित फोटो और वीडियो भेजने की जानकारी भी सामने आई है। व्यापारियों ने लिखित शिकायत देने की तैयारी की बात कही थी। इन शिकायतों के आधार पर नुकसान की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की जरूरत है। 
आवाज से नुकसान हुआ या दूसरी वजह, होगी जांच
सीओ सदर अंकुर गौतम ने बताया कि दुकानों के शीशे तेज आवाज के कारण टूटे अथवा इसकी कोई अन्य वजह थी, इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने डीजे संचालकों को निर्धारित मानकों के अनुसार आवाज रखने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी है। अधिकारी के बयान से स्पष्ट है कि व्यापारियों की शिकायत और जांच के निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल नुकसान का कारण दुकानदारों के दावे के रूप में सामने आया है। इसकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी। मौके पर ध्वनि स्तर की माप का कोई आंकड़ा भी उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।
जुलूस की व्यवस्था और आसपास की सुरक्षा का सवाल
यह मामला धार्मिक जुलूस के दौरान ध्वनि व्यवस्था के संचालन पर ध्यान देने की जरूरत सामने लाता है। आयोजन में शामिल लोगों के साथ रास्ते के दुकानदारों, निवासियों और राहगीरों की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। आवाज की होड़ से बचना और आयोजकों तथा संचालकों के बीच स्पष्ट समन्वय रखना ऐसी व्यवस्थाओं का आवश्यक हिस्सा है। दुकानों में कांच का सामान टूटने की शिकायत केवल आर्थिक नुकसान का विषय नहीं है। सामान गिरने की स्थिति में वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा भी चिंता बन सकती है। इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए नुकसान की खबर को चोट या बड़े हादसे के दावे से जोड़ना उचित नहीं होगा।
आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वालों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि जुलूस का मार्ग व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों से गुजर सकता है। वहां अलग-अलग जरूरतों वाले लोग रहते हैं। कार्यक्रम की तैयारी में मार्ग, समय, आवाज और शिकायत मिलने पर तत्काल संपर्क की व्यवस्था पर स्पष्टता उपयोगी हो सकती है।
शिकायतों पर निष्पक्ष पड़ताल जरूरी
व्यापारियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए उपलब्ध फोटो, वीडियो और नुकसान के विवरण को साथ देखकर परिस्थितियां स्पष्ट की जा सकती हैं। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि सामान कब गिरा और घटना के समय आसपास क्या स्थिति थी। किसी व्यक्ति या संचालक की जिम्मेदारी तय करने से पहले तथ्यों का सत्यापन आवश्यक है। घुघली में सामने आए इस मामले ने उत्सव की व्यवस्थाओं और स्थानीय लोगों की सुविधा के बीच संतुलन की जरूरत रेखांकित की है। फिलहाल व्यापारियों को अपनी शिकायतों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा है। नुकसान के कारण, उसके आकलन और आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति पुलिस की जांच तथा आधिकारिक जानकारी के बाद सामने आएगी।
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