राम नगरी में गूंजा वंदे मातरम्, 150वें वर्ष पर 1074 विद्यार्थियों-शिक्षकों ने किया सामूहिक गायन
अयोध्या। राम नगरी में शुक्रवार को राष्ट्रभक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिला। वंदे मातरम् की रचना के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती के संयोजन में सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्या भारती से जुड़े विद्यालयों में विद्यार्थियों, अभिभावकों, पुरातन छात्रों और आचार्यों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया। सामूहिक स्वर में गूंजे राष्ट्रगीत से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया।
कार्यक्रम के तहत सुबह 11 बजे विद्या भारती से जुड़े सभी विद्यालयों में एक साथ वंदे मातरम् का गायन शुरू हुआ। इसमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक, विद्यालयों के पुरातन छात्र, शिक्षक और आचार्य शामिल हुए। वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को गीत के ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय चेतना से परिचित कराना रहा।
देशव्यापी सामूहिक गायन अभियान का नेतृत्व ‘नमामि भारतम्’ की ओर से किया गया। इसी अभियान के तहत राम नगरी में भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य आयोजन शिवदयाल जायसवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, तुलसीनगर में हुआ। यहां विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
मुख्य कार्यक्रम में कुल 1074 विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता रही। निर्धारित समय पर सभी ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। बड़ी संख्या में एक साथ लोगों के स्वर मिलने से विद्यालय परिसर में राष्ट्रभक्ति का वातावरण बन गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संभाग निरीक्षक गोपाल राम मिश्र रहे। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों और अन्य लोगों को वंदे मातरम् के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा जागृत करने वाला महामंत्र है।
गोपाल राम मिश्र ने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। उन्होंने कहा कि यह रचना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना से जुड़ी रही। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् ने लोगों के बीच देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को वंदे मातरम् की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी परिचित कराया। बताया गया कि समय के साथ यह गीत मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, राष्ट्रीय चेतना और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी वंदे मातरम् के उद्घोष ने लोगों में उत्साह और देशप्रेम की भावना पैदा की।
विद्या भारती के विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और पुरातन छात्रों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बनाया। अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन कर मातृभूमि के प्रति सम्मान व्यक्त किया। विद्यालय परिसरों में सामूहिक गायन के दौरान अनुशासन और उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
आयोजकों के अनुसार, वंदे मातरम् के 150वें वर्ष को यादगार बनाने और इसके संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों को केवल गीत का गायन ही नहीं कराया गया, बल्कि उन्हें इसके इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध और राष्ट्रीय चेतना में इसके योगदान के बारे में भी जानकारी दी गई।
राम नगरी में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उसमें राष्ट्रभक्ति से जुड़े प्रतीकों के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को बताया कि वंदे मातरम् भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
मुख्य आयोजन स्थल शिवदयाल जायसवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तुलसीनगर में सुबह से ही कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थी निर्धारित समय पर विद्यालय परिसर में एकत्र हुए। अभिभावक, शिक्षक और पुरातन छात्र भी कार्यक्रम में पहुंचे। सुबह 11 बजे सामूहिक गायन शुरू होते ही पूरा परिसर वंदे मातरम् के स्वर से गूंज उठा।
वंदे मातरम् की रचना के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम केवल मुख्य आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रहा। विद्या भारती से जुड़े अन्य विद्यालयों में भी निर्धारित समय पर सामूहिक गायन किया गया। इस तरह एक ही समय पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अन्य लोग अभियान का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के गीत के रूप में याद किया गया। वक्ताओं ने नई पीढ़ी से देश के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों को जानने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर आयोजित सामूहिक गायन ने राम नगरी में राष्ट्रभक्ति का वातावरण बना दिया। 1074 विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता वाले मुख्य कार्यक्रम के साथ विद्या भारती से जुड़े विद्यालयों में हुए आयोजनों ने इस अवसर को विशेष बनाया। सामूहिक गायन के जरिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ऐतिहासिक रचना और उसके संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।