Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: कैबिनेट ने गुरुवार को 99 हिंदू बंगाली परिवारों को स्थायी पुनर्वास की मंजूरी दे दी है, जो पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से भारत में विस्थापित हुए थे। यह कदम इन परिवारों के लिए स्थायी सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री संजय निषाद ने कहा, "संपूर्ण इतिहास में कई लोग समय-समय पर विस्थापित हुए हैं—ब्रिटिश शासन, मुगलों और 1947 के विभाजन के दौरान। ये लोग समाज में जड़ें खो चुके हैं। अब हमारी सरकार के तहत, उनके पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।"
मंत्री ने बताया कि इन परिवारों के पुनर्वास के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है। राज्य सरकार ने परिवारों को आवासीय जमीन, सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत लाभ और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई है। इसके साथ ही, बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को सुनिश्चित करने के उपाय भी किए जा रहे हैं।
संजय निषाद ने कहा कि यह पहल केवल 99 परिवारों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सरकार पूरे राज्य में उन परिवारों की पहचान कर उनके स्थायी पुनर्वास पर ध्यान दे रही है, जिन्हें विभाजन और समय-समय पर हुए संकट के कारण अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस निर्णय को सामाजिक न्याय और मानवीय जिम्मेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे न केवल परिवारों को स्थायी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने जीवन में स्थिरता और सम्मान के साथ जीने का अवसर भी मिलेगा।
इससे पहले, राज्य में ऐसे कई कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं जिनमें विभाजन, आपदा या संघर्ष के कारण विस्थापित हुए परिवारों की मदद की गई है। स्थायी पुनर्वास के तहत यह परिवारों को नया जीवन और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करने का अवसर देगा। राज्य सरकार की इस पहल को स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन भी सराह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम इतिहास की विस्थापित पीढ़ियों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा और उन्हें राज्य की योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ने में मदद करेगा।
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