शिक्षक MLC चुनाव की मतगणना में हंगामा, भाजपा प्रत्याशी आगे, प्रशासन ने रखा पक्ष
गोरखपुर: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव की मतगणना में प्रथम वरीयता के चौथे और अंतिम राउंड के बाद भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बढ़त बना ली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उन्हें 11,881 मत मिले, जबकि निर्दलीय राजीव यादव 11,415 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। दोनों के बीच 466 मतों का अंतर रहा। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को 8,301 मत मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय में चल रही मतगणना के अंतिम चरण में विवाद भी सामने आया। सपा और निर्दलीय प्रत्याशी की ओर से गणना को लेकर सवाल उठाए गए। प्रशासन ने नियमानुसार मतगणना कराने की बात कही है। द्वितीय वरीयता की गणना शुरू होने के बाद मुकाबले के अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता बनी रही।
चौथे राउंड में बदली बढ़त की तस्वीर
शुरुआती चरणों में ध्रुव त्रिपाठी और राजीव यादव के बीच करीबी मुकाबला दिखाई दिया। पहले राउंड में ध्रुव को 3,813 और राजीव को 3,703 मत मिले थे। इस तरह भाजपा प्रत्याशी ने 110 मतों की शुरुआती बढ़त हासिल की। उस चरण में सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी 2,744 मतों के साथ तीसरे स्थान पर थे। दूसरे राउंड में स्थिति बदली और राजीव यादव आगे निकल गए। उन्हें कुल 7,457 मत मिले, जबकि ध्रुव त्रिपाठी के मतों की संख्या 7,424 रही। अंतर केवल 33 मतों का था। तीसरे राउंड के बाद राजीव की बढ़त बढ़कर 376 मत हो गई। तब राजीव को 11,287 और ध्रुव को 10,911 मत मिले थे। चौथे राउंड के बाद ध्रुव त्रिपाठी फिर आगे आ गए। लगातार बदलती बढ़त के कारण प्रत्याशियों और उनके अभिकर्ताओं की नजर हर चरण के आंकड़ों पर बनी रही। कम अंतर वाले इस मुकाबले में आगे होने वाली वरीयता आधारित गणना महत्वपूर्ण हो गई है।
अंतिम चरण की गणना पर आपत्ति
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रथम वरीयता के अंतिम चरण में सामने आए आंकड़ों पर सपा प्रत्याशी और निर्दलीय राजीव यादव ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर अधिकारी उन्हें समझाने पहुंचे। सपा प्रत्याशी मतगणना स्थल से बाहर चले गए। प्रत्याशियों ने धांधली के आरोप लगाए, जबकि प्रशासन ने नियमों के अनुसार प्रक्रिया संचालित होने की बात कही। द्वितीय वरीयता की गिनती शुरू होने पर राजीव यादव भी बाहर आए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बहिष्कार नहीं कर रहे हैं और उनके प्रतिनिधि अंदर मौजूद हैं। इसलिए उनके बाहर आने को पूरी मतगणना प्रक्रिया से हटने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए। आरोपों की सत्यता का निर्धारण निर्वाचन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के परीक्षण से होगा। केवल किसी राउंड में बढ़त बदलने से गड़बड़ी साबित नहीं होती, लेकिन दर्ज आपत्तियों का स्पष्ट जवाब देना प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
मतपेटियों और रिकॉर्ड को लेकर भी शिकायतें
मतगणना के दौरान अंतिम राउंड से पहले भी आपत्तियां सामने आई थीं। रिपोर्टों में देवरिया के बनकटा से संबंधित मतपेटी की सील को लेकर शिकायत का उल्लेख है। इसी तरह मऊ के एक मतदान केंद्र की पेटी में दर्ज संख्या से अधिक मतपत्र मिलने का दावा किया गया। प्रत्याशियों और उनके अभिकर्ताओं ने इन मामलों पर सवाल उठाए। दैनिक जागरण के अनुसार, मऊ के बूथ संख्या 115 के फॉर्म-16 में 623 मत दर्ज थे, जबकि पेटी से 675 मत मिलने की बात सामने आई। इस प्रकार 52 मतों के अंतर पर विवाद हुआ। ऐसी शिकायतों में मतदान अभिलेख, मतपत्रों की संख्या और संबंधित कर्मचारियों के रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण है। इन्हें जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित धांधली बताना उचित नहीं होगा।
चौदह टेबलों पर हुई मतपत्रों की गणना
मतगणना मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुई। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, गणना के लिए 14 टेबल लगाई गई थीं। प्रत्याशियों के अभिकर्ता सुबह से ही पहुंचने लगे थे। शुरुआत में मतपत्रों की गड्डियां बनाने का काम किया गया। चुनाव मैदान में कुल 16 प्रत्याशी होने के कारण विभिन्न उम्मीदवारों के प्रतिनिधि प्रक्रिया पर नजर रखे हुए थे। मतगणना केंद्र से मिल रहे अपडेट को लेकर बाहर भी उत्सुकता रही। समर्थक फोन और सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रत्याशी की स्थिति जानने का प्रयास करते रहे। शुरुआती बढ़त बदलने के साथ दोनों प्रमुख दावेदारों के समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ी। हालांकि, अधूरी गणना के आंकड़ों को अंतिम नतीजा समझना भ्रम पैदा कर सकता है।
द्वितीय वरीयता की गणना पर टिकी नजर
प्रथम वरीयता की गणना में आगे रहना अपने आप जीत की घोषणा नहीं है। इस निर्वाचन में निर्धारित कोटा और वरीयता के आधार पर आगे की गणना महत्वपूर्ण होती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम वरीयता के बाद द्वितीय वरीयता की गिनती शुरू की गई। इससे अंतिम समीकरण में बदलाव की संभावना बनी हुई है। फिलहाल उपलब्ध स्थिति में ध्रुव त्रिपाठी प्रथम वरीयता के मतों में आगे हैं और राजीव यादव उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी हैं। मतगणना संबंधी आपत्तियों पर प्रशासन के स्पष्टीकरण तथा निर्वाचन अधिकारी की औपचारिक परिणाम घोषणा के बाद ही विजेता की स्थिति स्पष्ट होगी।