बाइक ट्रांसफर नहीं होने पर RTO ऑफिस में हंगामा, भाई-बहन ने दलाल को पीटा
कानपुर। बाइक ट्रांसफर कराने के नाम पर 5000 रुपये लेने के बावजूद छह महीने तक काम नहीं होने और दस्तावेज वापस नहीं करने के आरोप में आरटीओ कार्यालय में जमकर हंगामा हो गया। नाराज आवेदक अमित तिवारी और उनकी बहन ने कथित दलाल के साथ मारपीट कर दी। अचानक हुई घटना से आरटीओ परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
आवेदक अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने लाल बंगला निवासी हर्ष सिंह चौहान की बाइक खरीदी थी। बाइक को अपने नाम पर ट्रांसफर कराने के लिए उन्होंने एक दलाल से संपर्क किया था। आरोप है कि दलाल ने उनसे बाइक ट्रांसफर कराने के लिए 5000 रुपये लिए और जरूरी कागजात भी अपने पास रख लिए।
अमित के मुताबिक रुपये और दस्तावेज देने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कुछ समय में बाइक उनके नाम ट्रांसफर हो जाएगी। लेकिन छह महीने बीत जाने के बावजूद न तो ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी हुई और न ही दस्तावेज वापस मिले।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वह दलाल से काम के बारे में पूछते तो वह आरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों का हवाला देकर मामला टाल देता था। कभी कहा जाता कि संबंधित बाबू काम नहीं कर रहा है तो कभी किसी अन्य प्रक्रिया के लंबित होने की बात बताई जाती थी।
अमित का कहना है कि समय बीतने के साथ दलाल ने बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र समेत अन्य कामों के नाम पर और रुपये मांगने शुरू कर दिए। इस पर उन्होंने अतिरिक्त रकम देने से मना कर दिया और अपने मूल दस्तावेज वापस मांगने लगे।
आरोप है कि दस्तावेज मांगने के बावजूद दलाल उन्हें वापस नहीं कर रहा था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। मंगलवार को अमित अपनी बहन के साथ आरटीओ कार्यालय पहुंचे और वहां दलाल से आमना-सामना हो गया।
आरटीओ परिसर में बाइक ट्रांसफर और दस्तावेज वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने पर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि अमित और उनकी बहन ने मिलकर दलाल की पिटाई कर दी।
मारपीट होते देख आरटीओ कार्यालय में मौजूद कर्मचारी और अन्य आवेदक भी मौके पर पहुंच गए। लोगों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की। कुछ समय तक परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
अमित ने आरोप लगाया कि छह महीने से वह अपने काम के लिए चक्कर काट रहे थे। रुपये देने के बाद भी बाइक का ट्रांसफर नहीं हुआ और जब उन्होंने पैसे देने से इनकार करते हुए कागज वापस मांगे तो उन्हें लगातार टालने की कोशिश की गई।
उनका कहना है कि यदि काम नहीं हो रहा था तो कम से कम उनके दस्तावेज वापस कर दिए जाने चाहिए थे। लंबे समय तक दस्तावेज रोके रखने और अतिरिक्त रकम मांगने से उनका गुस्सा बढ़ता गया।
मामले में दूसरे पक्ष यानी कथित दलाल की ओर से क्या सफाई दी गई है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में अमित द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना के बाद आरटीओ कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच दलालों की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। वाहन ट्रांसफर, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य परिवहन संबंधी कामों के लिए बड़ी संख्या में लोग रोज आरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं।
ऐसे मामलों में आवेदकों और निजी एजेंटों के बीच पैसों तथा दस्तावेजों के लेन-देन को लेकर विवाद भी सामने आते रहते हैं। इस घटना में भी मुख्य विवाद बाइक के ट्रांसफर, लिए गए 5000 रुपये और दस्तावेज वापस नहीं मिलने को लेकर बताया गया है।
अमित के अनुसार उन्होंने बाइक खरीदने के बाद सभी जरूरी कागजात दलाल को सौंप दिए थे। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि आरटीओ कार्यालय की प्रक्रिया पूरी कर बाइक उनके नाम करवा दी जाएगी। लेकिन लगातार समय बीतने के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं मिला।
छह महीने बाद भी ट्रांसफर नहीं होने पर उन्होंने खुद जानकारी लेने की कोशिश की। उनका आरोप है कि उन्हें बार-बार अलग-अलग कारण बताए जाते रहे। कभी संबंधित कर्मचारी का नाम लेकर काम रुकने की बात कही गई तो कभी अन्य दस्तावेज पूरे कराने के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे गए।
अमित ने कहा कि वह अब और पैसे नहीं देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने साफ तौर पर अपने कागज वापस मांगे। इसी मांग को लेकर विवाद बढ़ा और आरटीओ परिसर में मामला मारपीट तक पहुंच गया।
घटना के दौरान मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराया। मारपीट के कारण कुछ देर के लिए कार्यालय का सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ। लोग घटनाक्रम को देखने के लिए मौके पर जमा हो गए।
यदि किसी पक्ष की ओर से पुलिस में शिकायत दी जाती है तो मारपीट और पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि बाइक ट्रांसफर के नाम पर दिए गए दस्तावेज किसके पास हैं और प्रक्रिया वास्तव में किस स्तर पर लंबित थी।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि 5000 रुपये दिए जाने से संबंधित कोई रसीद, ऑनलाइन भुगतान या अन्य प्रमाण उपलब्ध है या नहीं। बाइक खरीद और ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों की जांच से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल आवेदक अमित तिवारी ने कथित दलाल पर छह महीने तक बाइक ट्रांसफर का काम नहीं करने, कागजात अपने पास रखने और अलग-अलग मदों में अतिरिक्त रुपये मांगने का आरोप लगाया है।
आरटीओ कार्यालय में हुआ यह विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। घटना के बाद परिसर में मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया। अब मामले में शिकायत और जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाइक ट्रांसफर का काम क्यों रुका था और दस्तावेज वापस नहीं किए जाने के आरोप में कितनी सच्चाई है।