नाले में मिला अज्ञात शव क्षतिग्रस्त कार से खुला हिट एंड रन का राज 72 घंटे बाद सुलझी गुत्थी
नोएडा: नोएडा सेक्टर-33 में प्रकाश अस्पताल के सामने शनिवार सुबह नाले के पास एक क्षतिग्रस्त कार मिलने और उसके नजदीक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद होने के मामले ने पुलिस को करीब 72 घंटे तक उलझाए रखा। कार उल्टी पड़ी थी और उसके चारों टायर फटे हुए थे। पास ही नाले में करीब 48 वर्षीय व्यक्ति का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मौत से पहले लगी चोटें यानी एंटी-मॉर्टम इंजरी और शॉक की वजह से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने इसे सड़क हादसा मानते हुए जांच आगे बढ़ाई।
जांच में सामने आया कि व्यक्ति की कार से टक्कर लगने के बाद मौत हुई थी। उसकी जांघ और पैर की हड्डियां टूटी मिलीं। चोटों के पैटर्न के आधार पर पुलिस को आशंका हुई कि हादसे के वक्त व्यक्ति खड़ा था और टक्कर लगने के बाद नाले में जा गिरा।
शनिवार सुबह मिला था शव
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह सेक्टर-33 में प्रकाश अस्पताल के सामने नाले के पास एक क्षतिग्रस्त कार दिखाई दी। कार की हालत देखकर आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि कार उल्टी पड़ी थी और उसके चारों टायर फटे हुए थे।
कार के आसपास जांच करने पर नाले में एक व्यक्ति का शव मिला। मृतक की पहचान उस समय नहीं हो सकी थी। उसकी उम्र करीब 48 वर्ष बताई गई। शव के पास और शरीर पर मिली चोटों को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि व्यक्ति की मौत कैसे हुई। कार दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिली थी, लेकिन पुलिस के सामने यह सवाल था कि कार और शव के बीच क्या संबंध है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आया कारण
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सुराग पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिला। रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम इंजरी यानी मौत से पहले लगी चोटों के साथ शॉक की वजह से मौत होने की बात सामने आई।
जांच के दौरान मृतक की जांघ और पैर की हड्डियां टूटी मिलीं। पुलिस के अनुसार चोटों की प्रकृति से यह आशंका मजबूत हुई कि व्यक्ति हादसे के समय खड़ा था। अगर वह पहले से नाले में लेटा या गिरा हुआ होता तो चोटों का पैटर्न अलग हो सकता था।
पोस्टमार्टम के निष्कर्षों के बाद पुलिस ने माना कि व्यक्ति को किसी वाहन ने टक्कर मारी और इसके बाद उसकी मौत हुई। क्षतिग्रस्त कार को इसी घटना से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।
72 घंटे तक क्यों उलझा रहा मामला?
पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या मृतक की पहचान थी। शव अज्ञात होने के कारण जांच को आगे बढ़ाने में समय लगा। पुलिस ने आसपास के कई थानों से संपर्क कर गुमशुदगी के मामलों की जानकारी जुटाई।
पुलिस के अनुसार 27 थानों में भी मृतक से संबंधित कोई मिसिंग रिपोर्ट नहीं मिली। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल था कि मृतक कौन है और उसके परिवार तक कैसे पहुंचा जाए।
पुलिस ने शव की पहचान के लिए उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड की जांच की। साथ ही घटना से जुड़े संभावित लोगों से पूछताछ की गई।
दूसरे दिन कराया गया पोस्टमार्टम
पुलिस का कहना है कि अज्ञात शव के मामले में निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिजनों की तलाश और पहचान का प्रयास किया गया। अधिकारियों के अनुसार 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम कराने का नियम होने के कारण भी प्रक्रिया में समय लगा।
हालांकि पुलिस ने दूसरे दिन यानी रविवार को ही पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हुई।
पुलिस का कहना है कि शव अज्ञात होने और स्वजन का इंतजार करने के कारण जांच में समय लगा। इस दौरान 27 थानों में मृतक से संबंधित गुमशुदगी की जानकारी तलाशने की कोशिश की गई।
आरोपियों से पूछताछ में नहीं मिली स्पष्ट जानकारी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की। हालांकि पुलिस के अनुसार आरोपितों की ओर से भी घटना के संबंध में शुरुआत में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
ऐसे में पुलिस को घटनास्थल, कार की स्थिति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जोड़कर पूरी घटना की कड़ी तैयार करनी पड़ी।
कार के चारों टायर फटे होने और वाहन के उल्टी अवस्था में मिलने से हादसा गंभीर होने का अंदाजा लगाया गया। पुलिस ने वाहन की स्थिति और घटनास्थल से मिले तथ्यों का भी परीक्षण किया।
कार की हालत से मिली अहम जानकारी
घटनास्थल पर उल्टी पड़ी कार जांच का प्रमुख केंद्र रही। चारों टायर फटे होने के कारण पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि वाहन किस गति से और किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
नाले के पास शव का मिलना भी जांच में महत्वपूर्ण था। पुलिस ने कार की स्थिति और शव पर मिली चोटों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया।
पोस्टमार्टम में सामने आई हड्डियों की चोट और शॉक से मौत की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को यह मानने का आधार मिला कि मामला महज किसी व्यक्ति के नाले में गिरने का नहीं, बल्कि वाहन की टक्कर से जुड़ा हो सकता है।
खड़े व्यक्ति को टक्कर लगने का अंदेशा
जांघ और पैर की हड्डियों में फ्रैक्चर को पुलिस ने जांच की अहम कड़ी माना। अधिकारियों के मुताबिक चोटों की प्रकृति से यह अंदेशा हुआ कि व्यक्ति हादसे के वक्त खड़ा था।
पुलिस अब घटना के समय व्यक्ति की गतिविधियों और उसके वहां पहुंचने की परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय वाहन कौन चला रहा था और दुर्घटना के बाद वाहन की स्थिति कैसे बनी।
हिट एंड रन के एंगल से जांच
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मामले को हिट एंड रन के एंगल से जोड़कर जांच की। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कार किस वाहन से टकराई और हादसे के बाद संबंधित वाहन चालक ने मौके से भागने की कोशिश की या नहीं।
घटनास्थल के आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है।
पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि हादसे में शामिल वाहन की पहचान और उसकी भूमिका को ठोस साक्ष्यों से स्थापित किया जाए।
पुलिस ने देरी पर दिया अपना तर्क
मामले को सुलझाने में करीब 72 घंटे लगने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि शव अज्ञात होने के कारण पहचान की प्रक्रिया में समय लगा।
अधिकारियों के मुताबिक परिवार के सदस्यों के आने का इंतजार किया गया और आसपास के 27 थानों में गुमशुदगी के रिकॉर्ड की जांच की गई। आरोपितों से पूछताछ के दौरान भी शुरुआत में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मौत की वजह और घटना की दिशा स्पष्ट हुई। इसके बाद पुलिस ने हिट एंड रन की आशंका के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
आगे की जांच जारी
फिलहाल पुलिस के सामने मृतक की पहचान, हादसे की पूरी परिस्थितियों और वाहन से जुड़ी कड़ियों को पुख्ता करना अहम है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर दी है।
सेक्टर-33 में प्रकाश अस्पताल के सामने मिले क्षतिग्रस्त वाहन और नाले में मिले शव के मामले में अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि टक्कर किस परिस्थिति में हुई और उसके बाद क्या घटनाक्रम रहा।