संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जमीन की खुदाई के दौरान ब्रिटिश शासनकाल के चांदी के सिक्के मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में एक मकान के शौचालय टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी का कलश मिलने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कलश में चांदी के पुराने सिक्के रखे हुए थे। कुछ सिक्कों पर वर्ष 1875 अंकित होने की जानकारी सामने आई है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि ये सिक्के ब्रिटिश शासनकाल के हो सकते हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सिक्के मिलने की घटना का खुलासा खुदाई के तुरंत बाद नहीं हुआ। दो मजदूरों के बीच सिक्कों के बंटवारे को लेकर विवाद होने पर मामला सामने आया। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और करीब 70 चांदी के सिक्के बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब इन सिक्कों की ऐतिहासिकता और वास्तविक मूल्य का पता लगाने के लिए आगे की जांच की तैयारी की जा रही है।
शौचालय टैंक की खुदाई के दौरान मिला कलश
मामला संभल जिले की गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव का है। यहां रहने वाले जितेंद्र के मकान में पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य चल रहा था।निर्माण के दौरान मकान में शौचालय टैंक बनाने के लिए जमीन की खुदाई कराई जा रही थी। इस काम में दो मजदूर लगाए गए थे।बताया जा रहा है कि खुदाई करते समय मजदूरों को जमीन के अंदर एक मिट्टी का कलश मिला। जब कलश में रखी सामग्री देखी गई, तो उसमें पुराने चांदी के सिक्के होने की बात सामने आई।सिक्कों को देखकर मजदूर भी हैरान रह गए। सामान्य निर्माण कार्य के दौरान इस तरह की पुरानी वस्तु मिलने की घटना ने बाद में पूरे गांव का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना करीब दो महीने पहले की बताई जा रही है, लेकिन इसकी जानकारी हाल में सामने आई।
मजदूरों ने मकान मालिक को नहीं दी जानकारी
इस मामले में आरोप है कि खुदाई के दौरान सिक्के मिलने के बाद दोनों मजदूरों ने इसकी जानकारी मकान मालिक को नहीं दी।बताया गया कि मजदूरों ने मिले हुए सिक्कों को अपने पास रख लिया और आपस में उनका बंटवारा कर लिया।हालांकि, शुरुआत में मामला किसी अन्य व्यक्ति के सामने नहीं आया।इस कारण सिक्कों की बरामदगी की जानकारी लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं हो सकी।अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खुदाई के समय कुल कितने सिक्के मिले थे और उनमें से कितने सिक्के किस व्यक्ति के पास पहुंचे।यह भी जांच का विषय है कि सिक्कों के अलावा कलश में कोई अन्य पुरानी वस्तु मौजूद थी या नहीं।
बंटवारे को लेकर विवाद हुआ तो खुला राज
पूरी घटना में नया मोड़ उस समय आया, जब दोनों मजदूरों के बीच सिक्कों के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया।बताया जा रहा है कि शुक्रवार को दोनों के बीच इस बात को लेकर कहासुनी हुई कि किसे कितने सिक्के मिले हैं।विवाद बढ़ने के बाद खुदाई में पुराना खजाना मिलने की बात अन्य लोगों तक पहुंच गई।इसके बाद पूरे गांव में घटना की चर्चा शुरू हो गई।स्थानीय लोगों को जब पता चला कि जमीन के अंदर से ब्रिटिश काल के चांदी के
सिक्के
निकले हैं, तो लोग इस घटना के बारे में जानकारी लेने लगे।मामले की सूचना पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच शुरू की गई।
पुलिस ने बरामद किए करीब 70 सिक्के
पुलिस ने सूचना मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई।शुरुआती स्थानीय रिपोर्ट में 65 चांदी के सिक्के पुलिस के कब्जे में लिए जाने की जानकारी दी गई थी। बाद की रिपोर्टों में बरामद सिक्कों की संख्या लगभग 70 बताई गई है।इसलिए बरामदगी की अंतिम संख्या पुलिस के विस्तृत आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगी।पुलिस यह भी पता लगा रही है कि खुदाई के दौरान कुल कितने सिक्के निकले थे। यदि कुछ सिक्के अन्य लोगों के पास हैं, तो उनकी जानकारी भी जुटाई जा सकती है।सिक्कों की गिनती के साथ उनकी बनावट, उन पर अंकित विवरण और धातु की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
1875 के बताए जा रहे चांदी के सिक्के
बरामद सिक्कों के संबंध में बताया जा रहा है कि उन पर वर्ष 1875 अंकित है।यह वह समय था, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। उस दौर में रानी विक्टोरिया के नाम और चित्र वाले सिक्के प्रचलन में थे।यदि इन सिक्कों के वर्ष और अन्य पहचान चिह्नों की पुष्टि होती है, तो वे करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने हो सकते हैं।हालांकि, केवल सिक्कों पर अंकित वर्ष के आधार पर उनकी प्रामाणिकता या बाजार मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सकता।इसके लिए सिक्कों की धातु, वजन, टकसाल का निशान, संरक्षण की स्थिति और ऐतिहासिक विवरण का विशेषज्ञ परीक्षण जरूरी है।पुराने सिक्कों का मूल्य उनकी दुर्लभता और स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
पुरातत्व विभाग से कराई जाएगी जांच
गुन्नौर क्षेत्र के सीओ अंकित मिश्रा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।उन्होंने कहा कि बरामद सिक्कों के संबंध में पुरातत्व विभाग को भी सूचना दी जाएगी, ताकि उनकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाया जा सके।विशेषज्ञों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिक्के वास्तव में किस काल के हैं।इसके अलावा यह भी पता लगाया जा सकता है कि वे सामान्य चलन में इस्तेमाल होने वाले सिक्के थे या किसी विशेष संग्रह का हिस्सा रहे हैं।फिलहाल पुलिस ने सिक्कों को कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ाई है।
जमीन में सिक्के क्यों छिपाए गए होंगे?
ब्रिटिश शासनकाल के सिक्के जमीन के अंदर कलश में मिलने से कई सवाल उठ रहे हैं।संभव है कि पुराने समय में किसी व्यक्ति ने अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जमीन के अंदर छिपाया हो।उस दौर में आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं आज की तरह व्यापक नहीं थीं। ऐसे में कुछ लोग धन और कीमती वस्तुएं घरों की जमीन या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रख देते थे।हालांकि, जगन्नाथपुर गांव में मिले सिक्कों को किसने और कब जमीन में रखा था, इसका कोई प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।इसलिए सिक्कों को छिपाए जाने के कारण से जुड़ी बातें फिलहाल अनुमान ही हैं।
खजाने पर किसका होगा अधिकार?
पुराने सिक्कों की बरामदगी के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठता है कि उन पर अधिकार किसका होगा।किसी व्यक्ति की जमीन से पुरानी वस्तु मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसे अपने पास रखना या बेचना स्वतः वैध हो जाएगा।ऐसे मामलों में वस्तु की प्रकृति, लागू कानूनी प्रावधानों और संबंधित अधिकारियों के निर्णय के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।यदि बरामद वस्तुओं का ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व सामने आता है, तो
संबंधित
विभाग उनकी जांच और संरक्षण के लिए कदम उठा सकता है।
जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
जगन्नाथपुर गांव में चांदी के सिक्के मिलने का मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है।पुलिस के सामने प्रमुख सवाल हैं कि खुदाई में कुल कितने सिक्के मिले, कितने लोगों के पास पहुंचे और क्या सभी सिक्के बरामद हो चुके हैं।वहीं, पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच से इनकी उम्र, प्रामाणिकता और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि हो सकेगी।फिलहाल जमीन के अंदर से मिले पुराने सिक्के पूरे इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं। दो मजदूरों के बीच बंटवारे को लेकर हुए विवाद ने उस घटना का खुलासा कर दिया, जो कई सप्ताह से लोगों की जानकारी से बाहर थी।
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