भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने का समय : योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को लंबे समय तक कमजोर करने और उसकी मौलिकता पर सवाल खड़े करने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने केवल भारत के वैभव और संपदा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि भारतीय ज्ञान, परंपरा और बौद्धिक विरासत को भी प्रभावित करने की कोशिश की। पौराणिक कथाओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं पर किए गए हमलों को भी उन्होंने इसी मानसिकता का हिस्सा बताया।
मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत अमरनाथ स्मृति भवन ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे। यह आयोजन राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित समसामयिक विषयों पर सम्मेलन श्रृंखला का हिस्सा था। सम्मेलन के पहले दिन ‘भारतीय ज्ञान का वर्तमान सिद्धांत’ विषय पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने प्राचीन भारत से लेकर वर्तमान समय तक की ज्ञान परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता ने ज्ञान और चिंतन के क्षेत्र में लंबे समय तक दुनिया का मार्गदर्शन किया है। भारत की परंपरा में ज्ञान को केवल पुस्तकीय जानकारी के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि जीवन, समाज, प्रकृति और मानव कल्याण से जोड़कर समझा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा पर विभिन्न कालखंडों में अलग-अलग प्रकार के दबाव आए। उनके अनुसार विदेशी आक्रांताओं ने भारत की संपदा को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यहां की ज्ञान परंपरा को भी कमजोर करने का प्रयास किया। उन्होंने पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक मान्यताओं पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके पीछे भारतीय समाज की जड़ों और उसके ज्ञान तंत्र को प्रभावित करने की कोशिश भी थी।
योगी आदित्यनाथ ने ब्रिटिश शासन के दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय इस प्रयास का स्वरूप और रास्ता बदल गया। उनके अनुसार औपनिवेशिक व्यवस्था के दौरान भारतीय समाज को उसकी अपनी परंपराओं और ज्ञान दृष्टि से दूर करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने के लिए शिक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से भी प्रभाव डाला गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा को स्वयं पहचाने और उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि केवल अपनी प्राचीन उपलब्धियों का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पीछे मौजूद तथ्यों, प्रमाणों और ज्ञान-विज्ञान की परंपरा का अध्ययन भी जरूरी है।
उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी तक भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। डिजिटल माध्यम, शोध, आधुनिक संचार तकनीक और नए शैक्षिक उपकरणों के जरिए प्राचीन ज्ञान को युवाओं से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय ज्ञान और परंपरा को भी आधुनिक प्रस्तुति के साथ उसके सामने रखना जरूरी है। इससे युवा अपनी विरासत को केवल इतिहास के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान और अनुभव की एक व्यापक परंपरा के रूप में समझ सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा में ज्ञान के व्यापक स्वरूप की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में ज्ञान का विकास अलग-अलग क्षेत्रों में हुआ। दर्शन, गणित, चिकित्सा, खगोल, भाषा, साहित्य, अध्यात्म और सामाजिक चिंतन जैसे अनेक क्षेत्रों में भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों का व्यवस्थित अध्ययन और दस्तावेजीकरण वर्तमान समय की आवश्यकता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर नई पीढ़ी में वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण विकसित करना भी आवश्यक है। इसके लिए शोध और प्रमाण आधारित अध्ययन को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर भारत अपनी प्राचीन विरासत को वर्तमान समय की जरूरतों से जोड़ सकता है।
गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा के वर्तमान संदर्भों पर विशेषज्ञों और विद्वानों ने भी विचार रखे। सम्मेलन श्रृंखला के माध्यम से समसामयिक विषयों पर विमर्श के साथ भारतीय चिंतन और परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत को अपनी ज्ञान विरासत को लेकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए इतिहास और परंपरा का अध्ययन केवल भावनात्मक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि प्रमाण, शोध और आधुनिक ज्ञान पद्धति के साथ किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने का यह उपयुक्त समय है। इसके लिए शोध संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और नई तकनीक से जुड़े माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। इससे प्राचीन भारतीय ज्ञान के विभिन्न पहलुओं को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा की पहचान और उसके संरक्षण का काम केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें समाज, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आह्वान किया कि भारतीय ज्ञान की परंपरा का अध्ययन करते हुए उसके प्रमाणों को सामने लाया जाए और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसे व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाए।
गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान प्राचीन भारतीय ज्ञान से लेकर वर्तमान समय की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानना, उसका प्रमाण आधारित अध्ययन करना और आधुनिक तकनीक के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।