लूट के विरोध में हत्या करने वालों को फांसी, कोर्ट ने माना जघन्य अपराध

Update: 2026-07-17 14:32 GMT

Muzaffarnagar मुजफ्फरनगर :  उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में शामली के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने लूट के विरोध में किसान की गोली मारकर हत्या करने वाले चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का मानते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी।

अदालत ने चारों दोषियों को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाने का आदेश दिया, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के बाद सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में वापस जेल भेज दिया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2011 का है। शामली जनपद के गांव कुडाना निवासी राहुल मलिक ने इस संबंध में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अगस्त 2011 को उसके मामा राज सिंह, निवासी गांव भोकरहेड़ी थाना भोपा, अपने गांव के रहने वाले बिजेंद्र के साथ बाइक से जा रहे थे।

बताया गया कि जब दोनों लोग गांव के पूर्व प्रधान नरेंद्र के बाग के पास पहुंचे तो वहां पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने लूटपाट शुरू कर दी। इस दौरान राज सिंह ने साहस दिखाते हुए दो बदमाशों को पकड़ लिया। इसी बीच एक अन्य बदमाश ने राज सिंह को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई।

वारदात के दौरान बदमाशों ने बिजेंद्र के साथ भी मारपीट की। उसे लाठी-डंडों से पीटा गया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह पेश किए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध माना और फांसी की सजा सुनाई।

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राजीव शर्मा और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) कुलदीप कुमार ने बताया कि अदालत ने अपराध की गंभीरता, घटना की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला समाज में भय पैदा करने वाला था और दोषियों ने बेहद क्रूर तरीके से वारदात को अंजाम दिया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लूट के दौरान एक व्यक्ति की जान लेना गंभीर अपराध है। न्यायालय ने माना कि दोषियों का कृत्य सामान्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह समाज के खिलाफ गंभीर अपराध है। इसी आधार पर अदालत ने इसे विरल से विरलतम अपराध मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। परिवार का कहना है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला है। वहीं पुलिस और अभियोजन पक्ष ने भी इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया।

इस मामले में करीब डेढ़ दशक तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए फैसले से इलाके में चर्चा का माहौल है। अदालत के इस निर्णय को अपराधियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि गंभीर अपराधों में कानून अपना काम पूरी सख्ती के साथ करेगा।

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