Jhansi की यह जगह बन गई खास पहचान

Update: 2026-07-03 11:25 GMT
Jhansi | झांसी :  उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक ऐसा इलाका मौजूद है, जिसकी जीवनशैली अपने आप में बेहद अनोखी है। इस जगह को लोग ‘पुलिया नंबर 9’ के नाम से जानते हैं। यहां की सबसे खास बात यह है कि लोगों के लिए समय जानने का सबसे भरोसेमंद साधन घड़ी नहीं, बल्कि रेलवे ट्रेनों के हॉर्न हैं।
इस इलाके में रहने वाले लोग वर्षों से ट्रेन की आवाज़ के साथ अपनी दिनचर्या को जोड़कर जी रहे हैं। सुबह की शुरुआत हो, दोपहर का समय या फिर शाम का ढलता सूरज—हर वक्त किसी न किसी ट्रेन के गुजरने और उसके हॉर्न की आवाज़ से लोग अंदाजा लगा लेते हैं कि समय क्या हुआ होगा। यहां के लोग इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें घड़ी देखने की जरूरत ही महसूस नहीं होती।
‘पुलिया नंबर 9’ में कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके लिए रेलवे ट्रैक और ट्रेन की आवाज़ केवल बाहरी शोर नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है। बच्चों की स्कूल जाने की तैयारी, दुकानदारों का दुकान खोलना और बंद करना, महिलाओं के घरेलू काम और बुजुर्गों की दिनचर्या—all कुछ न कुछ हद तक ट्रेनों के हॉर्न से ही निर्धारित होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां दिन के अलग-अलग समय पर गुजरने वाली ट्रेनों की आवाज़ें एक तरह से प्राकृतिक घड़ी का काम करती हैं। हर ट्रेन का समय लगभग तय होता है, इसलिए लोग बिना किसी तकनीकी साधन के भी अपने काम समय पर कर लेते हैं।
इस इलाके की यह खासियत बाहर से आने वाले लोगों को शुरुआत में काफी अजीब लगती है। वे हैरान होते हैं कि बिना घड़ी या मोबाइल के लोग कैसे समय का अनुमान लगा लेते हैं। लेकिन कुछ समय यहां बिताने के बाद वे भी इस व्यवस्था को समझने लगते हैं और यह अनुभव उनके लिए भी सामान्य हो जाता है।
स्थानीय निवासियों का मानना है कि रेलवे लाइन के पास रहने की वजह से उनकी जिंदगी का तालमेल हमेशा ट्रेनों के साथ जुड़ा रहा है। धीरे-धीरे यह आदत उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गई है और अब यह एक परंपरा की तरह चल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे इलाके जहां लोग प्राकृतिक या बाहरी संकेतों पर निर्भर होकर अपनी दिनचर्या तय करते हैं, वे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी रोचक होते हैं। ‘पुलिया नंबर 9’ भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जहां आधुनिक तकनीक की जगह परंपरागत अनुभव और ध्वनि आधारित समय निर्धारण आज भी जीवित है।
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