लखनऊ/अमेठी। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। अमेठी के गौरीगंज में आयोजित कार्यक्रम के जरिए तीनों नेताओं ने भाजपा का दामन थामा। इस घटनाक्रम को समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।तीनों नेताओं ने अपने फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को प्रमुख कारण बताया है। नेताओं का कहना है कि वे भाजपा की नीतियों और सरकार के कामकाज से प्रभावित होकर पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं।
राकेश प्रताप सिंह ने बताया भाजपा में शामिल होने का कारण
अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने के फैसले को लेकर अपने क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और इस फैसले में अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया।राकेश प्रताप सिंह ने कहा, "मैं अपने चुनाव क्षेत्र के उन लोगों को दिल से बधाई देता हूं जिन्होंने मुझे सही रास्ता दिखाया। उन्होंने मुझसे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का आग्रह किया और मुझे अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया।"उन्होंने भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले को घर वापसी भी बताया। उनका कहना है कि वे पहले भी भाजपा से जुड़े रहे हैं और अब दोबारा पार्टी में लौट रहे हैं।
तीनों विधायक अलग-अलग क्षेत्रों का करते हैं प्रतिनिधित्व
भाजपा में शामिल होने वाले तीनों विधायक उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।राकेश प्रताप सिंह अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं।राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को समाजवादी पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद विधानसभा में असंबद्ध सदस्य माना गया था, जबकि विनोद चतुर्वेदी समाजवादी पार्टी के विधायक थे।इन तीनों नेताओं का भाजपा में शामिल होना आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
स्मृति ईरानी और पंकज चौधरी की मौजूदगी में कार्यक्रम
अमेठी में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी तय की गई थी।इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी तथा उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी शामिल थे।पार्टी के स्थानीय नेताओं के मुताबिक, कार्यक्रम की तैयारियां पहले से की जा रही थीं। तीनों विधायकों के पार्टी में शामिल होने की तारीख 14 अक्टूबर निर्धारित की गई थी।
राज्यसभा चुनाव में भी सामने आई थी बगावत
समाजवादी पार्टी के इन विधायकों की नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी थी। वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान तीनों नेताओं ने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।इसके बाद समाजवादी पार्टी के साथ उनके संबंधों में दूरी बढ़ गई थी। राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई।राकेश प्रताप सिंह ने सपा नेतृत्व पर परिवारवाद और जातिवाद को लेकर आरोप लगाए थे। उन्होंने पार्टी की नीतियों से असहमति जताते हुए भाजपा के साथ जाने का फैसला किया।हालांकि, ये आरोप उनके व्यक्तिगत राजनीतिक बयान हैं और समाजवादी पार्टी का पक्ष उनसे अलग है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की ओर से संगठन को मजबूत करने और नए नेताओं को जोड़ने की गतिविधियां तेज हो रही हैं।भाजपा में तीन विधायकों की एंट्री को भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है।राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी का अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक आधार रहा है। उनके पार्टी बदलने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।वहीं, समाजवादी पार्टी के सामने अपने संगठन और विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समर्थन बनाए रखने की चुनौती है।फिलहाल तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल-बदल का यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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