SIR से घबराई सपा, अखिलेश यादव की जमीन खिसक गई

Update: 2025-10-31 15:18 GMT
Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी SIR (Systematic Identification of Real Voters) का विरोध कर रहे हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी पारदर्शी चुनाव नहीं चाहती। ब्रजेश पाठक ने कहा, “SIR का विरोध करने का मतलब है ऐसी मतदाता सूची का विरोध करना जिसे भारत निर्वाचन आयोग ने पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने की घोषणा की है। सपा के लोग जानते हैं कि अगर SIR लागू हो गया तो उनकी राजनीति का आधार ही खत्म हो जाएगा।”
“घुसपैठियों के सहारे चुनाव जीतना चाहती है सपा”
उपमुख्यमंत्री ने सपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों के माध्यम से चुनाव जीतने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि SIR व्यवस्था ऐसे फर्जी वोटरों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से बाहर करेगी, जिससे निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी के लोगों ने हमेशा वोट बैंक की राजनीति की है। वे चाहते हैं कि असली मतदाता किनारे हों और फर्जी नामों से उन्हें फायदा मिले। लेकिन जब निर्वाचन आयोग ने SIR लागू करने की घोषणा कर दी है, तो अखिलेश यादव की जमीन खिसक चुकी है।”
“देश और प्रदेश पारदर्शी चुनाव चाहते हैं”
ब्रजेश पाठक ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता अब चाहती है कि केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान करें। उन्होंने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार निष्पक्ष चुनाव के लिए हर कदम पर निर्वाचन आयोग के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य साफ है — एक व्यक्ति, एक वोट की लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करना। SIR तकनीक इसी दिशा में क्रांतिकारी कदम है, जिससे फर्जी वोटिंग, डुप्लिकेट नाम और चुनावी गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगेगी।”
सपा पर राजनीतिक प्रहार
डिप्टी सीएम ने कहा कि सपा नेताओं को लोकतंत्र की नहीं बल्कि अपनी हार की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि सपा का विरोध यह दिखाता है कि उन्हें अपनी हार साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि पारदर्शी व्यवस्था आने के बाद जनता उन्हें नकार देगी। यही कारण है कि वे हर सुधार का विरोध करते हैं। चाहे चुनावी सुधार हो या भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, सपा हमेशा विकास और ईमानदारी के रास्ते में अड़चन बनती रही है।”
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
SIR प्रणाली को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। जहां भाजपा इसे पारदर्शिता और लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बता रही है, वहीं सपा इसे केंद्र सरकार की “मतदाता सूची में हेरफेर की चाल” कह रही है।
ब्रजेश पाठक के इस बयान से यह साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी ईमानदारी और पारदर्शिता के प्रतीक के रूप में जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रही है।
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