'शस्त्र पूजन' का अनादि काल से है नाता, शस्त्र पूजन मूल्यों की रक्षा का प्रतीक पर्व
देश विरोधी शक्तियां को परास्त करने के लिए और आत्मरक्षा के लिए शस्त्र पूजन के साथ ही साथ उनके मनोबल परास्त करने के लिए संगठन, शक्ति को मजबूत बनाने का कार्य करें: दिवाकर जी
मीरजापुर, (उप्र)। आज जहां पूरे देश में विजयादशमी पर्व की धूम है तो वहीं शस्त्र पूजन के की भी परंपरा है। शस्त्र पूजन धर्म-संस्कृति मूल्यों की रक्षा का प्रतीक पर्व है। देश विरोधी शक्तियां को परास्त करने के लिए और आत्मरक्षा के लिए शस्त्र पूजन के साथ ही साथ उनके मनोबल परास्त करने के लिए संगठन, शक्ति को मजबूत बनाने का कार्य भी है यह कहना है सनातन संस्कृति में आस्था रखने वालों का, वह कहते हैं
'शस्त्र पूजन' का अनादि काल से है नाता, शस्त्र पूजन मूल्यों की रक्षा का प्रतीक पर्व भी है। मंगलवार को विख्यात देवी धाम विंध्याचल क्षेत्र के विश्व हिंदू परिषद कार्यालय इमलहा नाथ महादेव मंदिर दक्षिण फाटक लालड़िग्गी पर बजरंग दल के विभाग संयोजक प्रवीण के नेतृत्व में शस्त्र पूजन कार्यक्रम संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सत्संग प्रमुख दिवाकर ज़ी ने अपने वक्तव्य में कहा की विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजा का मुख्य उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत, शक्ति और आत्मरक्षा का सम्मान करना एवं धर्म और न्याय की रक्षा शस्त्रों को केवल हिंसा का साधन ही नहीं, बल्कि अधर्म, अन्याय और बुराई का नाश करने वाले पवित्र माध्यम के रूप में देखा जाता है।
यह परंपरा व्यक्ति के भीतर आत्मबल, पराक्रम और आत्मविश्वास की वृद्धि का प्रतीक है। साधनों और आजीविका का सम्मान इसका दायरा सिर्फ तलवार या बंदूकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि उन सभी उपकरणों और साधनों का आदर, पूजन करना चाहिए, जिनसे व्यक्ति अपनी आजीविका कमाता है, जैसे किसानों के कृषि उपकरण, वाहन चालकों के वाहन, कारखानों की मशीनें और दफ्तरों के कंप्यूटर या कलम।
शक्ति का उपयोग धर्म समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए हो
शस्त्र पूजा के समय यह संकल्प लिया जाता है कि शक्ति का उपयोग कभी किसी को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि समाज, परिवार और देश की सुरक्षा व धर्म की स्थापना के लिए ही किया जाएगा। प्रभु श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने और रावण का वध करने से पहले अपने धनुष-बाण (शस्त्र) की पूजा की थी।
महिषासुर का वध करने के बाद देवताओं ने मां दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया था। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान शमी के पेड़ पर अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे और विजयदशमी के दिन उन्हें पुनः प्राप्त कर उनकी पूजा की थी। उक्त अवसर पर हम सभी कार्यकर्ताओं को भी आज के जो तमाम देश विरोधी शक्तियां हैं उनको परास्त करने के लिए और आत्मरक्षा के लिए शस्त्र पूजन के साथ ही साथ उनके मनोबल परास्त करने के लिए संगठन शक्ति को मजबूत बनाने का कार्य करें।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष हरिशंकर ने किया और कार्यक्रम का कुशल संचालन बजरंग दल के विभाग संयोजक प्रवीण के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रान्त सत्संग प्रमुख महेश तिवारी, जिला विमर्श प्रमुख अशोक दुबे, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल, नगर मंत्री बृजेश गुप्ता, विभाग सह संयोजक अशोक सिंह, जिला सह संयोजक पवन उमर, जिला बालोपासना प्रमुख कोमल अग्रहरि, कार्यालय प्रमुख विजय, नगर सत्संग प्रमुख दिनय दुबे, ओम प्रकाश सेठ,भाजपा के नगर मंत्री राहुल जैन, पवन शर्मा, किशन चौरसिया, आलोक मौर्य, शुभ गुप्ता, द्वारिका प्रसाद, प्रीतम केशरवानी, आशुतोष हैहैयवंशी रणधीर साहू, निर्मल दुबे, किशन केशरी आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।