लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर धंसी सड़क 15 किमी तक बनीं नालियां
एक्सप्रेसवे पर 15 किमी तक सड़क धंसी 200 मीटर में भरा पानी
उन्नाव: हाल ही में शुरू हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और जलभराव की समस्या लगातार सामने आ रही है। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन पर करीब 15 किलोमीटर के दायरे में कई स्थानों पर सड़क का हिस्सा धंसने से लंबी नाली जैसी संरचनाएं बन गई हैं। बारिश का पानी इनमें जमा होने के कारण वाहन चालकों की परेशानी और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर लगातार 34वें दिन सड़क धंसने से जुड़ी खामी सामने आई है।
सबसे ज्यादा समस्या मोइद्दीनपुर गांव के पास किलोमीटर 70.1 से पड़री के झब्बा खेड़ा गांव के नजदीक किलोमीटर 55.2 तक बताई गई है। इस हिस्से में अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने से करीब तीन मीटर चौड़ी नाली जैसी स्थिति बन गई है। बारिश होने के बाद इन गड्ढेनुमा हिस्सों में पानी जमा हो रहा है, जिससे तेज रफ्तार में आने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
नेवरना गांव के पास किलोमीटर 62.7 से 62.9 के बीच हालात ज्यादा चिंताजनक बताए गए हैं। यहां करीब 200 मीटर तक सड़क पर बारिश का पानी जमा है। कुछ हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत प्रभावित होने से बजरी और गिट्टी तक दिखाई देने लगी है। इससे नए एक्सप्रेसवे के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कोरारी कला गांव के पास किलोमीटर 71.8 पर करीब 30 मीटर धंसी सड़क की कुछ दिन पहले पैचिंग की गई थी। हालांकि मरम्मत वाला हिस्सा सड़क की सामान्य सतह से ऊंचा होने के कारण यहां से गुजरते समय वाहनों को झटका लगने की समस्या बताई गई है। इसी तरह कुछ अन्य स्थानों पर भी पैचवर्क के बाद सड़क की सतह एक समान नहीं होने की शिकायत सामने आई है। कोरारी गांव के पास किलोमीटर 64.1 पर सड़क के नीचे बारिश का पानी पहुंचने के कारण करीब 10 मीटर हिस्से में डामर फूलकर उखड़ने लगा है। यह जगह उस हिस्से से करीब 50 मीटर पहले है जहां जुलाई के आखिर में लगभग 200 मीटर सड़क धंसने की समस्या सामने आई थी। बाद में निर्माण एजेंसी ने प्रभावित हिस्से को करीब तीन फीट गहराई तक खोदकर दोबारा तैयार किया था।
लखनऊ से उन्नाव की ओर जाने वाली लेन पर भी कुछ जगहों पर पैचिंग और सड़क की सतह में अंतर दिखाई दिया है। कोरारी खुर्द के पास किलोमीटर 70.2 और पाठकपुर तौरा के बीच किलोमीटर 61.8 पर मरम्मत वाले हिस्से ऊंचे होने के कारण वाहन चालकों को झटके लग रहे हैं। इससे खासकर तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है। एक शुरुआती विशेषज्ञ जांच में सड़क की समस्या के पीछे कमजोर और अधिक प्लास्टिक वाली मिट्टी तथा सड़क के नीचे फंसे पानी के संयुक्त प्रभाव की आशंका जताई गई है। जांच के मुताबिक ऐसी मिट्टी और पानी सड़क की संरचनात्मक मजबूती को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि वास्तविक कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर इससे पहले भी कई स्थानों पर डामर उखड़ने, गिट्टी निकलने और पानी जमा होने जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। पिछले सप्ताह की एक रिपोर्ट में कम से कम 15 स्थानों पर नुकसान की बात सामने आई थी और प्रभावित हिस्सों में मरम्मत का काम चल रहा था।
एक्सप्रेसवे को जुलाई में यातायात के लिए खोला गया था। इतने कम समय में सड़क धंसने और लगातार मरम्मत की जरूरत पड़ने से निर्माण की गुणवत्ता और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खास तौर पर मानसून के दौरान सड़क के नीचे पानी पहुंचने की समस्या को रोकना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और तकनीकी जांच जारी है। बारिश के दौरान वाहन चालकों को इन हिस्सों से गुजरते समय गति नियंत्रित रखने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि एक्सप्रेसवे के इतने लंबे हिस्से में बार-बार सड़क धंसने की समस्या क्यों पैदा हो रही है और इसे स्थायी रूप से दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।