वाराणसी: ज्ञानवापी मामले में समझौते की कोशिशें नाकाम हो गई हैं। मध्यस्थता कोर्ट में हुई सुनवाई पूरी हो गई, लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों ने साफ कहा कि यह मामला स्वामित्व विवाद से जुड़ा है और इसका समाधान अदालत के फैसले से ही होगा।
मंगलवार को मध्यस्थता कोर्ट में ज्ञानवापी विवाद से जुड़ी चार पत्रावलियों पर सुनवाई हुई। इस दौरान सभी संबंधित पक्षकार और उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी और कहा कि वे समझौते के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मध्यस्थता के जरिए इस विवाद को सुलझाने की संभावना खत्म हो गई है। दोनों पक्षों ने अदालत के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही है। उनका कहना है कि जो भी फैसला कानून के आधार पर आएगा, उसे माना जाएगा।
मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के प्रतिनिधि और अधिवक्ता भी मध्यस्थता बैठक में शामिल हुए। कमेटी के वकील मुमताज अहमद ने कहा कि इस मामले में मध्यस्थता से समाधान संभव नहीं है, क्योंकि विवाद स्वामित्व से जुड़ा हुआ है। एक पक्ष का दावा है कि यह स्थान मंदिर है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मस्जिद बताता है। ऐसे में फैसला अदालत ही कर सकती है।
वहीं हिंदू पक्ष ने भी समझौते की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि वह अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। पक्षकारों का मानना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ही आना चाहिए।
ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता की प्रक्रिया विवाद को आपसी सहमति से हल करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब मामला दोबारा अदालत की सुनवाई के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
बैठक में यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों को अदालत के फैसले पर भरोसा है और वे न्यायिक प्रक्रिया का पालन करेंगे। मध्यस्थता वार्ता खत्म होने के बाद अब सभी की नजरें ज्ञानवापी से जुड़े मामलों की आगे की सुनवाई और अदालत के फैसले पर टिकी हैं।