बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में रामलीला मंचन से जुड़े पुराने वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एडिट कर वायरल करने की धमकी देकर एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव पेहरुवाला में रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने चार यूट्यूबर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 20,730 रुपये और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। दूसरी ओर, वीडियो विवाद के चलते बंद हुआ रामलीला मंचन बुधवार रात से दोबारा शुरू हो गया है। घटना ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग और एआई तकनीक से वीडियो में कथित छेड़छाड़ को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुराने वीडियो को लेकर शुरू हुआ विवाद
मामला बिजनौर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के गांव पेहरुवाला का है। यहां ग्रामीणों की ओर से धार्मिक परंपरा के तहत रामलीला का आयोजन किया जा रहा था।रामलीला मंचन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए जा रहे थे। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें कथित तौर पर अश्लील नृत्य दिखाए जाने की बात कही गई।
इस वीडियो को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस ने रामलीला मंचन के दौरान हो रहे नृत्य को रुकवा दिया।इस कार्रवाई से ग्रामीणों और रामलीला कमेटी के सदस्यों में नाराजगी फैल गई। आयोजकों का कहना था कि वीडियो मौजूदा आयोजन का नहीं, बल्कि करीब दो साल पुराना है।
AI की मदद से वीडियो एडिट करने का आरोप
रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने करीब दो वर्ष पुराने वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एडिट किया।इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने और रामलीला कमेटी की छवि खराब करने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो का इस्तेमाल दबाव बनाने और रुपये वसूलने के लिए किया गया।हालांकि, वीडियो में वास्तव में कितनी छेड़छाड़ हुई और इसके लिए किन तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया गया, इसकी अंतिम पुष्टि डिजिटल फोरेंसिक जांच से ही हो सकेगी।
एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप
पुलिस को दी गई शिकायत में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष खिलेन्द्र ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक लाख रुपये की मांग की थी।शिकायत के अनुसार, रुपये नहीं देने पर रामलीला मंचन रुकवाने और सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजकों को बदनाम करने की धमकी दी गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर पुराने वीडियो को सोशल मीडिया समूहों और पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाकर दबाव बनाने का प्रयास किया।शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
चार यूट्यूबर के खिलाफ मुकदमा दर्ज
रामलीला कमेटी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।बताया गया है कि इस प्रकरण में चार यूट्यूबर को आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस ने आरोपियों की भूमिका और वीडियो प्रसारित करने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की।इस दौरान यह भी जांच का विषय बना कि वीडियो किसने तैयार किया, किसने उसे प्रसारित किया और रंगदारी की मांग में किन लोगों की भागीदारी थी।पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
20,730 रुपये और तीन मोबाइल फोन बरामद
पुलिस के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को रसूलपुर जागन उर्फ लक्खूवाला चौराहे के पास रुपये लेते समय दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन पुत्र सुनील कुमार, निवासी रतनगढ़, थाना शिवालाकला और सादाब उर्फ शाहदत पुत्र क्यूम खान, निवासी तंगरौला, थाना नूरपुर के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 20,730 रुपये और तीन मोबाइल फोन बरामद किए।पुलिस का कहना है कि इन मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एसपी कार्यालय पहुंचे थे ग्रामीण
इस विवाद को लेकर मंगलवार, 13 अक्टूबर को पेहरुवाला गांव के ग्रामीण और रामलीला कमेटी के पदाधिकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे।ग्रामीणों ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना पूरी जांच किए रामलीला मंचन के दौरान लोकनृत्य बंद करा दिया।
उनका कहना था कि रामलीला में महिला वेश धारण कर युवक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुराने वीडियो को एडिट करके ऐसे प्रस्तुत किया गया, मानो मौजूदा कार्यक्रम में आपत्तिजनक नृत्य हो रहा हो।उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
नाराज ग्रामीणों ने बंद कर दिया था मंचन
रामलीला के दौरान नृत्य रुकवाए जाने से आयोजकों में नाराजगी बढ़ गई थी।ग्रामीणों का कहना था कि रामलीला के सांस्कृतिक कार्यक्रम को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।इससे नाराज रामलीला कमेटी के सदस्यों ने मंचन बंद करने का फैसला लिया।आयोजकों ने विरोध स्वरूप रामलीला का मंच तक हटा दिया था।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे गांव में रामलीला आयोजन को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी।ग्रामीणों ने प्रशासन से धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखने और पुराने वीडियो की सच्चाई सामने लाने की मांग की।
बुधवार रात फिर शुरू हुआ रामलीला मंचन
विवाद और पुलिस कार्रवाई के बाद बुधवार, 14 अक्टूबर की रात गांव में रामलीला मंचन दोबारा शुरू कर दिया गया।मंचन दोबारा शुरू होने से श्रद्धालुओं और आयोजकों ने राहत महसूस की।
रामलीला कमेटी की ओर से धार्मिक कार्यक्रम को जारी रखने का निर्णय लिया गया।ग्रामीणों के लिए रामलीला केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता से जुड़ा आयोजन है।इसी वजह से मंचन बंद होने पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली थी।
डिजिटल वीडियो की जांच बनी महत्वपूर्ण
इस मामले में पुराने वीडियो की वास्तविकता की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।एआई तकनीक के माध्यम से वीडियो और ऑडियो में बदलाव करना संभव है। ऐसे में किसी वीडियो को देखकर उसकी सत्यता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता।
जांच में मूल वीडियो, एडिट किए गए संस्करण, उनके प्रसारण का समय और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।इसके अलावा धमकी भरे संदेशों, मोबाइल फोन और रुपये के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच भी मामले को स्पष्ट करने में मदद करेगी।पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कथित रंगदारी की योजना में किन लोगों की कितनी भूमिका थी।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर उठे सवाल
पेहरुवाला गांव की घटना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग का गंभीर मुद्दा सामने रखा है।किसी पुराने वीडियो को भ्रामक तरीके से प्रसारित करने से संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।यदि इस तरह के वीडियो का इस्तेमाल धमकाने या रुपये वसूलने के लिए किया जाता है, तो यह आपराधिक जांच का विषय बन सकता है।हालांकि, इस मामले में सभी आरोपियों की दोषसिद्धि अभी नहीं हुई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
दो गिरफ्तार, बाकी आरोपियों की भूमिका की जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके कब्जे से रुपये और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।अन्य आरोपियों की भूमिका और कथित रूप से एडिट किए गए वीडियो से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है।दूसरी ओर, रामलीला का मंचन दोबारा शुरू होने से गांव में धार्मिक आयोजन फिर सामान्य रूप से चल रहा है।