Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी और उनके यहां बसने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार शहर में मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के विस्तार के बाद बाहरी मजदूरों की मांग बढ़ी थी, जिसके बाद कुछ रोहिंग्या परिवार अलीगढ़ पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि साल 2009-10 के आसपास मीट उद्योग में तेजी आने के बाद इन परिवारों के आने का सिलसिला शुरू हुआ।
जानकारी के अनुसार शुरुआत में कई परिवार अलीगढ़ के मकदूम नगर इलाके में किराये के मकानों में रहने लगे। धीरे-धीरे इनमें से कुछ लोग मीट फैक्ट्रियों में ठेकेदारी और मजदूरी के काम से जुड़ गए। स्थानीय स्तर पर मजदूरों की जरूरत और कम लागत में काम करने वाले लोगों की उपलब्धता के कारण इनका नेटवर्क बढ़ता गया।
खुफिया तंत्र के अनुसार मीट एक्सपोर्ट उद्योग में तेजी के दौरान अलीगढ़ में सस्ते श्रमिकों की मांग काफी बढ़ गई थी। इसी का फायदा उठाकर कुछ रोहिंग्या परिवार बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत पहुंचे और अलग-अलग स्थानों पर बस गए। अलीगढ़ पहुंचने के बाद उन्होंने मकदूम नगर क्षेत्र को अपना प्रमुख ठिकाना बनाया।
स्थानीय लोगों की मदद से कई परिवारों को किराये पर रहने की जगह मिली। समय के साथ कुछ लोगों ने यहां रोजगार भी हासिल कर लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार इन लोगों में से ज्यादातर मीट फैक्ट्रियों में काम करते थे। हालांकि समय-समय पर प्रशासन की कार्रवाई और जांच के बाद कई लोग यहां से वापस चले गए।
खुफिया एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग सोने की तस्करी जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। करीब पांच साल पहले अलीगढ़ से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का दायरा बढ़ाया था।
पांच साल पहले तक जिले में 246 रोहिंग्या पंजीकृत बताए गए थे। रिकॉर्ड के अनुसार इनमें से कई लोगों के पास शरणार्थी कार्ड भी मौजूद थे। उस समय इनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई थी। हालांकि बाद में प्रशासनिक कार्रवाई और सख्ती के कारण कई लोगों की संख्या कम होती गई।
वर्तमान में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अलीगढ़ जिले में केवल आठ रोहिंग्या पंजीकृत बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाए जाते रहे हैं, ताकि जिले में अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बाहरी नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी व्यक्ति के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने या अवैध रूप से रहने की जानकारी सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
मीट एक्सपोर्ट उद्योग अलीगढ़ की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और यहां बड़ी संख्या में मजदूर इस क्षेत्र से जुड़े हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर नजर रखती हैं कि उद्योग की आड़ में कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो।
कुल मिलाकर अलीगढ़ में रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। आने वाले समय में सत्यापन और जांच प्रक्रिया के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।