चंद्रयान-4 और मानव मिशन की तैयारी तेज़, 2047 तक चांद पर भारतीयों को भेजने का लक्ष्य

Update: 2025-10-28 15:20 GMT
Kanpur कानपुर। भारत के पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित “मिशन 2047” के तहत भारत का लक्ष्य अगले दो दशकों में मानव को चांद पर भेजना और सुरक्षित वापस लाना है। उन्होंने बताया कि इसरो ने इस दिशा में गगनयान, चंद्रयान-3 की सफलताओं के बाद अब चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 की तैयारी शुरू कर दी है। कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए एस. सोमनाथ ने कहा, “हमारा लक्ष्य 2047 तक मनुष्य को चांद पर भेजना और सुरक्षित वापस लाना है, जो भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के साथ मेल खाएगा। यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसके लिए कई चरणों में कार्य करना होगा — तकनीक विकसित करनी होगी, अंतरिक्ष स्टेशन बनाना होगा और शक्तिशाली रॉकेट तैयार करना होगा।”
उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन की शुरुआत हो चुकी है और इसके तहत भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन अगले वर्ष लॉन्च होने की उम्मीद है। वहीं, चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की तकनीक को और उन्नत करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। सोमनाथ ने बताया कि अब इसरो ने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है, जिनका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग और सुरक्षित वापसी की तकनीक विकसित करना है। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 ने हमें चंद्र सतह पर सफल लैंडिंग सिखाई। अब हमें यह सीखना है कि वहां से मानव और यान दोनों को सुरक्षित कैसे लौटाया जाए।”
पूर्व इसरो प्रमुख ने बताया कि भारत अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) भी बनाने जा रहा है। उसका डिज़ाइन तैयार किया जा रहा है, और आने वाले वर्षों में इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इस स्टेशन के जरिए भारत अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति और अनुसंधान क्षमता हासिल करेगा। उन्होंने बताया कि इन महत्वाकांक्षी अभियानों को पूरा करने के लिए इसरो अपने LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) रॉकेट की क्षमता को चार गुना बढ़ा रहा है। “हमारे पास पहले से ही एक शक्तिशाली रॉकेट है, लेकिन मानव मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन के लिए हमें और अधिक क्षमता की जरूरत है। इसलिए हमने LVM3 की शक्ति और पेलोड क्षमता को चार गुना बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया है,” उन्होंने कहा।
सोमनाथ ने यह भी बताया कि भारत अब वैश्विक स्पेस इकॉनमी (Space Economy) में अपनी हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। इसके लिए निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत को केवल रॉकेट लॉन्च करने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तकनीक में विश्व अग्रणी के रूप में उभरना होगा। पूर्व इसरो प्रमुख ने यह भी कहा कि आने वाले पांच वर्षों में इसरो का ध्यान तकनीकी आत्मनिर्भरता, वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने पर रहेगा। उन्होंने अंत में कहा, “मिशन 2047 भारत के वैज्ञानिक आत्मविश्वास और भविष्य की दृष्टि का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यह सपना साकार होगा, जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री चांद पर तिरंगा फहराएंगे और सुरक्षित लौटेंगे।
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