मथुरा। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वृंदावन में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की सुबह श्रद्धा और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज करीब पांच महीने बाद एक बार फिर सड़क पर पैदल चलते दिखाई दिए। अपने नए आश्रम यमुना विहार कुंज से श्री राधा केली कुंज आश्रम जा रहे प्रेमानंद महाराज ने रास्ते में बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को देखकर अचानक अपनी कार रुकवा दी। भक्तों के भावुक चेहरे देखकर वह गाड़ी से नीचे उतरे और कुछ दूरी तक पैदल चलने लगे। महाराज को अपने बीच पाकर श्रद्धालुओं की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
इस दौरान वृंदावन की सड़कें 'राधे-राधे' और 'श्री हरिवंश' के जयकारों से गूंज उठीं। लंबे समय बाद महाराज को पैदल देखकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े रहे, जबकि कुछ भावुक होकर रोने लगे। प्रेमानंद महाराज की यह पदयात्रा अब श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
पांच महीने बाद सड़क पर पैदल दिखे प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अपनी नियमित पदयात्रा बंद कर दी थी। इससे उनके अनुयायियों में मायूसी थी।रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इससे पहले 27 मई 2026 को पदयात्रा की थी। इसके बाद वह अपने स्वास्थ्य और अन्य कारणों से नियमित रूप से पैदल दर्शन देने नहीं निकल रहे थे।शुक्रवार सुबह जब महाराज नए आश्रम से केली कुंज की ओर जा रहे थे, तब बड़ी संख्या में भक्त उनके दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए उन्होंने कुछ दूरी पैदल तय की। करीब पांच महीने बाद सार्वजनिक रूप से इस तरह पैदल चलते देखना भक्तों के लिए विशेष क्षण बन गया।
वाराह घाट तिराहे पर उमड़ी भक्तों की भीड़
जानकारी के अनुसार, प्रेमानंद महाराज शुक्रवार सुबह अपने नए आश्रम यमुना विहार कुंज से वाहनों के काफिले के साथ श्री राधा केली कुंज आश्रम के लिए रवाना हुए थे।जब उनका वाहन वाराह घाट तिराहे के पास पहुंचा, तो वहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ मौजूद थी।भक्त महाराज के दर्शन के लिए सड़क के दोनों तरफ खड़े थे। जैसे ही लोगों ने उनकी गाड़ी देखी, जयकारे लगाने शुरू कर दिए।इसके बाद महाराज ने वाहन रुकवाया और पैदल चलना शुरू कर दिया।इस अप्रत्याशित दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। कई लोग हाथ जोड़कर महाराज को नमन करते दिखाई दिए।
भक्तों की आंखों से छलके खुशी के आंसू
प्रेमानंद महाराज के प्रति उनके अनुयायियों की गहरी श्रद्धा है। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन और सत्संग के लिए वृंदावन पहुंचते हैं।पिछले कुछ महीनों से नियमित पदयात्रा बंद होने के कारण भक्त उनके दर्शन का इंतजार कर रहे थे।ऐसे में शुक्रवार की सुबह महाराज का अचानक पैदल चलना श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।महाराज की एक झलक पाने के लिए सड़क किनारे खड़े लोगों ने उनका अभिवादन किया। पूरे मार्ग पर भक्तिमय माहौल दिखाई दिया।
स्वास्थ्य कारणों से बंद की थी नियमित पदयात्रा
प्रेमानंद महाराज लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनकी किडनी से जुड़ी बीमारी और डायलिसिस के बारे में पहले भी सार्वजनिक रूप से जानकारी सामने आ चुकी है।स्वास्थ्य कारणों से 18 मई 2026 को उनकी नियमित पदयात्रा और एकांतिक दर्शन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की गई थी।इसके बाद महाराज के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को आश्रम की ओर से जारी सूचनाओं का पालन करने की सलाह दी गई थी।नियमित पदयात्रा स्थगित होने के बावजूद भक्तों की उनके प्रति आस्था बनी रही।
नए आश्रम में कर रहे हैं एकांतवास
प्रेमानंद महाराज वर्तमान में यमुना पार मांट क्षेत्र के जहांगीरपुर खादर स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम में निवास कर रहे हैं।यह स्थान वृंदावन के प्रमुख आश्रम क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित है।वहीं, श्री राधा केली कुंज आश्रम उनके धार्मिक कार्यक्रमों और सत्संग से जुड़ा प्रमुख स्थल रहा है।महाराज समय-समय पर अपने नए आश्रम से केली कुंज पहुंचते रहे हैं। हालांकि, नियमित सार्वजनिक दर्शन और पदयात्रा की पूर्व व्यवस्था अब तक बहाल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
केली कुंज आश्रम में कुछ देर रुके महाराज
शुक्रवार की पदयात्रा के बाद प्रेमानंद महाराज श्री राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह आश्रम में लगभग आधे घंटे तक रुके।इसके बाद वह अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे रवाना हुए।श्रद्धालुओं के लिए शुक्रवार का यह दौरा इसलिए भी विशेष रहा, क्योंकि लंबे समय बाद उन्हें महाराज के पैदल दर्शन करने का अवसर मिला।
आठ अक्टूबर को भी पहुंचे थे केली कुंज
इससे पहले प्रेमानंद महाराज आठ अक्टूबर 2026 को भी श्री राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे थे।उस दिन वह सुबह करीब सवा पांच बजे यमुना विहार कुंज से वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे थे।आश्रम में कुछ समय रुकने के बाद वह वाराह घाट स्थित अपने गुरु के आश्रम पहुंचे और दर्शन किए।इसके बाद वह पुनः अपने नए आश्रम लौट गए थे।उनके इस दौरे के समय भी बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित हुए थे। श्रद्धालुओं ने 'राधे-राधे' और 'श्री हरिवंश' के जयकारे लगाकर उनका स्वागत किया था।
सोशल मीडिया पर भी रहते हैं चर्चा में
प्रेमानंद महाराज अपने आध्यात्मिक प्रवचनों और जीवन से जुड़े संदेशों के कारण सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं।उनके सत्संग के वीडियो बड़ी संख्या में लोग देखते हैं।महाराज विशेष रूप से राधा नाम जप, भक्ति, सेवा, सदाचार और मन की शांति जैसे विषयों पर मार्गदर्शन देते रहे हैं।उनके अनुयायियों में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं।आध्यात्मिक सवालों के सरल उत्तर और जीवन से जुड़ी शिक्षाओं के कारण उनके प्रवचन सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं।
नियमित पदयात्रा शुरू होगी या नहीं?
शुक्रवार को प्रेमानंद महाराज के पैदल दर्शन देने के बाद अब श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह फिर से नियमित पदयात्रा शुरू करेंगे।हालांकि, अभी इस संबंध में आश्रम प्रबंधन की ओर से कोई निश्चित कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।महाराज की स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए नियमित दर्शन और पदयात्रा का कार्यक्रम बदल सकता है।इसलिए उनके दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले आश्रम के अधिकृत माध्यमों से ताजा जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
वृंदावन में फिर दिखा भक्तिमय माहौल
शुक्रवार सुबह की इस घटना ने एक बार फिर वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के प्रति श्रद्धालुओं के गहरे लगाव की झलक दिखाई।जिस मार्ग से उनका काफिला गुजर रहा था, वहां मौजूद लोगों ने भावुक होकर उनका स्वागत किया।भक्तों के लिए यह केवल कुछ दूरी की पदयात्रा नहीं थी, बल्कि महीनों से चले आ रहे इंतजार के बाद उनके दर्शन का विशेष अवसर था।
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