दो सिल्वर मेडल जीतकर गांव लौटीं प्रीति पाल, ढोल-नगाड़ों और फूलों से हुआ भव्य स्वागत
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की बेटी और अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट प्रीति पाल ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। जापान के आईची-नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स 2026 में प्रीति ने महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर टी-35 दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो रजत पदक अपने नाम किए। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दोहरी सफलता हासिल करने के बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर को अपने पैतृक गांव हाशमपुर पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। गांव में ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ ग्रामीणों ने अपनी होनहार बेटी का अभिनंदन किया। प्रीति की उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। परिजनों और ग्रामीणों ने कहा कि प्रीति ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष से न केवल परिवार और गांव, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
जापान में दो रजत पदक जीतकर रचा इतिहास
जापान के आईची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में प्रीति पाल ने अपनी शानदार गति और प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने 20 अक्टूबर को महिलाओं की 200 मीटर टी-35 दौड़ में 29.53 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक जीता।
इसके अगले दिन 21 अक्टूबर को प्रीति ने 100 मीटर टी-35 स्पर्धा में भी दूसरा स्थान हासिल किया।
इस दौड़ को उन्होंने 13.98 सेकंड में पूरा किया।
इस तरह प्रीति ने दो दिन में दो रजत पदक जीतकर भारतीय दल की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
दोनों स्पर्धाओं में चीन की झोउ शिया ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
27 अक्टूबर को गांव पहुंचीं तो उमड़ पड़ा जनसैलाब
जापान में प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद प्रीति पाल 26 अक्टूबर की देर रात भारत लौटीं।
उनके पिता अनिल पाल के अनुसार, प्रीति 27 अक्टूबर को मेरठ, मुजफ्फरनगर, जानसठ और मीरापुर होते हुए अपने पैतृक गांव हाशमपुर पहुंचीं।
गांव में पहले से ही उनके स्वागत की तैयारियां की गई थीं।
जैसे ही प्रीति गांव पहुंचीं, ढोल-नगाड़े बजने लगे और ग्रामीणों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।
परिजनों ने प्रीति को कार में बैठाकर गांव की परिक्रमा कराई। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं और प्रीति की सफलता पर एक-दूसरे को बधाई दी।
इस दौरान बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
मेरठ और मुजफ्फरनगर में भी हुआ सम्मान
प्रीति पाल के सम्मान का सिलसिला उनके गांव पहुंचने से पहले ही शुरू हो गया था।
दिल्ली एयरपोर्ट पर भारत लौटने के बाद खेल जगत से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया।
इसके बाद मेरठ में भी प्रीति को सम्मानित किया गया।
गॉडविन कॉलोनी में राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर बधाई दी।
मुजफ्फरनगर पहुंचने पर अहिल्याबाई चौक पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने उनका अभिनंदन किया।
लोगों ने प्रीति की उपलब्धि को जिले के लिए गौरव का क्षण बताया।
इसके बाद वह अपने परिवार के साथ हाशमपुर पहुंचीं, जहां ग्रामीण लंबे समय से उनके आने का इंतजार कर रहे थे।
पिता अनिल पाल ने जताई बेटी की सफलता पर खुशी
प्रीति पाल के पिता अनिल कुमार पाल ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि प्रीति ने मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर देश तथा अपने गांव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
अनिल पाल के अनुसार, बेटी की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।
प्रीति के पदक जीतने की खबर मिलते ही परिवार में जश्न शुरू हो गया था।
परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिठाइयां बांटीं और बेटी के स्वागत की तैयारियां की थीं।
प्रीति की मां बलेश देवी ने भी बेटी के दो रजत पदक जीतने पर खुशी जाहिर की।
परिवार का कहना है कि प्रीति की सफलता ने ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
बचपन की मुश्किलों को हराकर बनीं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
प्रीति पाल की सफलता के पीछे संघर्ष और मेहनत की लंबी कहानी है।
बचपन से ही उन्हें पैरों से संबंधित शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
जन्म के बाद उनके पैरों में कमजोरी और असामान्य बनावट के कारण उपचार कराना पड़ा था।
उन्होंने कई वर्षों तक पैरों के सहायक उपकरणों का उपयोग किया।
इन कठिनाइयों के बावजूद प्रीति ने खेलों में अपना भविष्य बनाने का सपना नहीं छोड़ा।
किशोरावस्था में पैरा एथलेटिक्स से प्रेरणा लेकर उन्होंने दौड़ में अभ्यास शुरू किया।
वर्ष 2018 में राज्य स्तरीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की।
लगातार अभ्यास और बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।
पेरिस पैरालिंपिक में भी जीते थे दो कांस्य पदक
प्रीति पाल इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।
वर्ष 2024 में आयोजित पेरिस पैरालिंपिक में उन्होंने महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर टी-35 स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते थे।
इस उपलब्धि के साथ वह एक ही पैरालिंपिक में एथलेटिक्स के दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं।
पेरिस की सफलता ने प्रीति को देश की प्रमुख पैरा एथलीटों में स्थान दिलाया।
वर्ष 2025 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इसके बाद भी उन्होंने अभ्यास जारी रखा और जापान के एशियाई पैरा खेलों में दो रजत पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में नया अध्याय जोड़ा।
पिछले एशियन पैरा गेम्स से इस बार बेहतर प्रदर्शन
प्रीति पाल ने इस बार एशियाई पैरा खेलों में अपने पिछले प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया।
वर्ष 2022 के एशियन पैरा गेम्स में वह 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में चौथे स्थान पर रही थीं।
उस प्रतियोगिता में उन्होंने 100 मीटर दौड़ 15.24 सेकंड में पूरी की थी।
वर्ष 2026 में इसी स्पर्धा में उनका समय 13.98 सेकंड रहा।
इस तरह उन्होंने अपने प्रदर्शन में 1.26 सेकंड का सुधार किया और रजत पदक हासिल किया।
वहीं, 200 मीटर स्पर्धा में भी उन्होंने पहले की तुलना में बेहतर समय निकाला।
यह उपलब्धि उनके निरंतर अभ्यास और प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन में सुधार को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दी बधाई
प्रीति पाल की दोहरी सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी।
21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि प्रीति ने दो दौड़ में दो रजत पदक जीतकर यादगार प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री ने उनकी गति, निरंतर प्रगति और दृढ़ संकल्प की सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रीति की सफलता बताती है कि मेहनत और आत्मविश्वास से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
प्रधानमंत्री के संदेश के बाद प्रीति की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिली।
बेटियों को आगे बढ़ाने का दिया संदेश
गांव में सम्मान समारोह के दौरान प्रीति पाल ने अपनी सफलता को लेकर खुशी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिलना चाहिए।
परिवारों को बेटा-बेटी के बीच भेदभाव किए बिना उनकी प्रतिभा और रुचि के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग करना चाहिए।
प्रीति ने युवाओं को मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में भी खेल प्रतिभा की कमी नहीं है।
यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण और परिवार का सहयोग मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
खेल के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभाल रहीं प्रीति
प्रीति पाल खेलों में सफलता हासिल करने के साथ सरकारी सेवा में भी कार्यरत हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत खंड विकास अधिकारी के पद पर नियुक्त किया था।
वर्तमान में उनकी तैनाती लखनऊ में बताई गई है।
खेल और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए वह अपने प्रशिक्षण को भी महत्व दे रही हैं।
उनकी इस उपलब्धि से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
हाशमपुर की बेटी ने फिर बढ़ाया देश का मान
एशियन पैरा गेम्स 2026 में दो रजत पदक जीतकर लौटीं प्रीति पाल का स्वागत हाशमपुर गांव के लिए यादगार अवसर बन गया।
ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ अपनी बेटी की सफलता का जश्न मनाया।
प्रीति की उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार मेहनत से अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की जा सकती है।
पेरिस पैरालिंपिक के दो कांस्य पदकों के बाद जापान में दो रजत पदक जीतना प्रीति पाल के खेल करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।