आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में ‘सुशांत ताज सिटी’ प्रोजेक्ट के एक प्लॉट से जुड़े विवाद की जांच के सिलसिले में पुलिस ने अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (अंसल API) से जुड़े पांच लोगों को नोटिस जारी किए हैं। पुलिस ने इन लोगों से जांच में शामिल होकर अपना बयान दर्ज कराने के साथ मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेज और अन्य सामग्री उपलब्ध कराने को कहा है।पुलिस की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत ये नोटिस जारी किए गए हैं। जिन पांच लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें रोशन लाल कंबोज, विपुल गर्ग, संजय जैन, अशोक कुमार वर्मा और कांता देवी शामिल हैं। नोटिस में इन लोगों को कंपनी से जुड़े डायरेक्टर या पदाधिकारी के रूप में बताया गया है।पुलिस ने सभी संबंधित लोगों से नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर जगदीशपुरा पुलिस स्टेशन में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने के लिए कहा है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि मामले की जांच में उपयोगी साबित होने वाले दस्तावेज, रिकॉर्ड या अन्य सामग्री भी अपने साथ लेकर आएं।
जांच के तहत जारी किए गए नोटिस
मामला आगरा में विकसित किए गए ‘सुशांत ताज सिटी’ प्रोजेक्ट के एक प्लॉट से संबंधित विवाद से जुड़ा है। पुलिस इस विवाद से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसी प्रक्रिया के तहत कंपनी से जुड़े बताए जा रहे लोगों से जानकारी मांगी गई है।महत्वपूर्ण बात यह है कि BNSS की धारा 94 के तहत नोटिस जारी किया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने या उसके खिलाफ अपराध साबित होने का संकेत नहीं है। यह जांच के दौरान दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री या अन्य आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत कराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कानूनी प्रक्रिया है।BNSS की धारा 94 अदालत या पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को जांच, पूछताछ, मुकदमे या अन्य कानूनी कार्यवाही के लिए जरूरी माने जाने वाले दस्तावेज अथवा सामग्री पेश करने की मांग करने का अधिकार देती है। इसलिए मौजूदा मामले में नोटिस को जांच के एक चरण के रूप में देखा जा रहा है।
तीन दिन के भीतर पेश होने को कहा
पुलिस ने रोशन लाल कंबोज, विपुल गर्ग, संजय जैन, अशोक कुमार वर्मा और कांता देवी से कहा है कि वे नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर जगदीशपुरा पुलिस स्टेशन पहुंचें।जांच अधिकारी के सामने उनसे मामले से संबंधित जानकारी ली जा सकती है। इसके साथ ही उनसे ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे गए हैं जिनसे प्लॉट के स्वामित्व, आवंटन, लेनदेन या विवाद से संबंधित परिस्थितियों को स्पष्ट करने में मदद मिल सके।पुलिस की जांच का उद्देश्य उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करना है। फिलहाल जांच जारी है और नोटिस प्राप्त करने वाले लोगों की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड भी आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
दस्तावेजों की होगी जांच
प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। प्लॉट के आवंटन से संबंधित रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, कंपनी के रिकॉर्ड, समझौते और संबंधित पत्राचार जैसे दस्तावेज जांच में तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।इसी वजह से पुलिस ने नोटिस में संबंधित लोगों को जांच में सहायक दस्तावेज और सामग्री लेकर आने के लिए कहा है। पुलिस इन दस्तावेजों को शिकायत और जांच के दौरान अब तक सामने आए अन्य रिकॉर्ड से मिलाकर देख सकती है।दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्लॉट से संबंधित विवाद में अलग-अलग पक्षों के दावों की वास्तविक स्थिति क्या है।
नोटिस का मतलब दोष साबित होना नहीं
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह भी है कि जिन पांच लोगों को नोटिस भेजा गया है, उनके खिलाफ केवल नोटिस जारी होने के आधार पर किसी तरह का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।BNSS की धारा 94 के तहत जांच एजेंसी आवश्यक दस्तावेज या सामग्री हासिल करने के लिए संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेज सकती है। यह जांच की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।इसलिए नोटिस पाने वाले लोगों को आरोपी या दोषी मानना उचित नहीं होगा, जब तक कि जांच में उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री सामने न आए और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी पुष्टि न हो।
बयान दर्ज करने की तैयारी
जगदीशपुरा पुलिस अब नोटिस पाने वाले पांच लोगों के बयान दर्ज करने और उनसे मिलने वाले दस्तावेजों की जांच करने की तैयारी कर रही है। उनके बयान के आधार पर जांच अधिकारी जरूरत पड़ने पर अन्य संबंधित लोगों से भी जानकारी मांग सकते हैं।जांच में यदि किसी दस्तावेज की पुष्टि की जरूरत पड़ती है तो संबंधित विभाग, संस्था या अन्य पक्षों से रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। इस तरह पुलिस अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त जानकारी को जोड़कर प्लॉट विवाद की पूरी परिस्थितियों को समझने की कोशिश करेगी।
प्रॉपर्टी विवाद में रिकॉर्ड अहम
जमीन और प्लॉट से जुड़े मामलों में कई बार एक ही संपत्ति को लेकर अलग-अलग पक्ष स्वामित्व, आवंटन या भुगतान के आधार पर अपना दावा पेश करते हैं। ऐसी स्थिति में जांच एजेंसी के लिए मूल रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण हो जाते हैं।मौजूदा मामले में भी पुलिस का ध्यान दस्तावेजी साक्ष्यों पर है। इसी क्रम में अंसल API से जुड़े बताए जा रहे पांच लोगों से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि संबंधित प्लॉट को लेकर कंपनी के रिकॉर्ड में क्या जानकारी मौजूद है और विवाद से जुड़े विभिन्न पक्षों के दावों का इन रिकॉर्ड से क्या संबंध है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल पुलिस ने जांच के तहत पांच लोगों को नोटिस भेजकर उनसे सहयोग मांगा है। सभी को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर जगदीशपुरा पुलिस स्टेशन में जांच अधिकारी के सामने पेश होने को कहा गया है।इन लोगों के बयान और उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी या कथित भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।सुशांत ताज सिटी के प्लॉट से जुड़े इस विवाद में अब पुलिस की जांच दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में नोटिस पाने वाले लोगों की ओर से दी जाने वाली जानकारी और रिकॉर्ड के आधार पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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