लखनऊ। उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कांग्रेस और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतने के बजाय विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। चौधरी ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन का एकमात्र संवैधानिक रास्ता चुनाव है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या विपक्ष अब सरकार बदलने के लिए अराजकता का सहारा लेना चाहता है।पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देश में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
राहुल गांधी पर साधा निशाना, पूछा बड़ा सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने पोस्ट में लिखा, "लोकतंत्र में 'सत्ता परिवर्तन' का रास्ता चुनाव के जरिए होता है। कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं। तो क्या अब वे 'सत्ता परिवर्तन' के लिए अराजकता का सहारा लेंगे? क्या राहुल गांधी देश में अराजकता लाना चाहते हैं?"उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रही है।चौधरी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बनाने या बदलने का निर्णय जनता अपने मताधिकार के माध्यम से करती है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।
सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
पंकज चौधरी का यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा कांग्रेस और विपक्षी दलों पर लगाए गए आरोपों के बाद सामने आया है।राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल बांग्लादेश की राजनीतिक घटनाओं से प्रेरणा लेकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि विपक्ष चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहता है।राजनाथ सिंह के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर सवाल
देश में इन दिनों चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए हैं।विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार तथा चुनाव आयोग से सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है।वहीं, भाजपा के नेताओं का आरोप है कि विपक्ष इन मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भी उठा चुके हैं सवाल
इससे पहले 11 अक्टूबर को भी पंकज चौधरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा था।उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान अराजकता फैलाने का प्रयास किया गया, लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हुई।लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाना चाहिए।चौधरी ने विपक्षी नेताओं पर युवाओं को राजनीतिक आंदोलनों के माध्यम से गुमराह करने का भी आरोप लगाया था।
कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन के आरोपों पर दिया जवाब
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि पार्टी चुनावों के माध्यम से सरकार बदलना चाहती है।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कहा कि विपक्ष का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से मौजूदा सरकार को हराना है।उन्होंने वर्ष 1977 में हुए सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में जनता चुनावों के माध्यम से सरकार बदलती रही है।खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस अपने 'वोट चोर गद्दी छोड़' अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रही है।
लोकतंत्र और सत्ता परिवर्तन को लेकर सियासत तेज
पंकज चौधरी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता परिवर्तन तथा विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दे पर बयानबाजी और तेज हो गई है।भाजपा जहां विपक्षी आंदोलनों की मंशा पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस इन प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा बता रही है।हालांकि, कांग्रेस द्वारा अराजकता फैलाने या गैर-लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की साजिश रचने के आरोप राजनीतिक दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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