नौतनवा। नेपाल-चीन सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के छह दिन बाद भी प्रभावित इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित ग्यिरोंग पोर्ट में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि 546 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए हैं। इनमें 49 भारतीय और 104 नेपाली नागरिक भी हैं।

प्रभावित क्षेत्र में बचाव और तलाश अभियान के बीच बड़ी संख्या में लोगों का पता नहीं चल पाना चिंता बढ़ा रहा है। बाढ़ और भूस्खलन ने सड़क संपर्क तथा अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भी मुश्किलें बनी हुई हैं।

546 लोगों की तलाश जारी

अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ग्यिरोंग पोर्ट और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों से कुल 546 लोग लापता बताए गए हैं। आपदा के छह दिन गुजर जाने के बावजूद इन लोगों का पता नहीं चल सका है।

लापता लोगों की बड़ी संख्या के कारण राहत और बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती बनी हुई है। प्रभावित इलाकों में मलबे और क्षतिग्रस्त रास्तों के बीच खोज अभियान चलाया जा रहा है।

समय बीतने के साथ लापता लोगों के परिजनों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

49 भारतीय नागरिक भी लापता

लापता विदेशी नागरिकों में भारत के 49 लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा नेपाल के 104 नागरिकों का भी पता नहीं चल पाया है।

नेपाल और भारत से बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में यात्रा करते हैं। ग्यिरोंग पोर्ट नेपाल और चीन के बीच आवाजाही के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। आपदा के समय वहां मौजूद यात्रियों और अन्य लोगों की जानकारी जुटाकर उनकी स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों का पता नहीं

अधिकारियों के मुताबिक लापता 546 लोगों में 261 विदेशी नागरिक हैं, जो 23 अलग-अलग देशों से संबंधित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 104 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। इसके बाद भारत के 49 और लातविया के 33 नागरिकों का नाम सामने आया है।

अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक भी लापता लोगों की सूची में बताए गए हैं। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के छह-छह नागरिकों के बारे में भी जानकारी नहीं मिल सकी है।

दक्षिण अफ्रीका के चार नागरिक, जबकि मलेशिया, जर्मनी और रूस के तीन-तीन नागरिक लापता बताए गए हैं। अन्य देशों के नागरिक भी इस सूची में शामिल हैं।

अब तक 16 मौतों की पुष्टि

ग्यिरोंग पोर्ट में बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। प्रभावित क्षेत्र में तलाश अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों से जुड़े आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।

आपदा के बाद कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मलबा जमा हो गया है। पानी के तेज बहाव ने भी कई स्थानों पर नुकसान पहुंचाया है।

बाढ़ के साथ भूस्खलन ने बढ़ाई तबाही

इस आपदा में केवल बाढ़ ही नहीं बल्कि भूस्खलन ने भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है। पहाड़ी इलाका होने के कारण भारी बारिश के बाद जमीन खिसकने और चट्टानें गिरने से कई रास्ते प्रभावित हुए।

बाढ़ का तेज पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा लेकर आया। इससे कई जगह आवाजाही बाधित हुई और बचाव दलों के लिए दूरदराज के प्रभावित हिस्सों तक पहुंचना मुश्किल हुआ।

छह दिन बाद भी हालात चुनौतीपूर्ण

आपदा के छह दिन बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। सबसे बड़ी चुनौती सैकड़ों लापता लोगों को तलाशने की है।

बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं में शुरुआती घंटों और दिनों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण खोज अभियान कठिन हो सकता है।

ग्यिरोंग पोर्ट का विशेष महत्व

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट नेपाल-चीन सीमा पर एक महत्वपूर्ण आवाजाही बिंदु है। यहां से दोनों देशों के बीच लोगों और सामान की आवाजाही होती है।

सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां विदेशी यात्रियों की मौजूदगी भी रहती है। यही वजह है कि आपदा में प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के नाम सामने आए हैं।

23 देशों के नागरिकों के लापता होने के कारण मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है।

विदेशी नागरिकों की पहचान बड़ी चुनौती

आपदा के बाद विदेशी नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए उनकी यात्रा संबंधी जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण होगा। अलग-अलग देशों के नागरिक होने के कारण संबंधित दूतावासों और अधिकारियों के बीच समन्वय की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

लापता लोगों की सूची में मौजूद नामों की पुष्टि और उनकी अंतिम लोकेशन से जुड़ी जानकारी खोज अभियान में मददगार हो सकती है।

भारतीय परिवारों की बढ़ी चिंता

49 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी भारतीय परिवारों के लिए चिंता का कारण है। सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार और सड़क संपर्क प्रभावित होने की स्थिति में कई बार यात्रियों से संपर्क टूट जाता है।

ऐसे में लापता घोषित किए गए सभी लोगों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि तलाश और सत्यापन के बाद ही हो सकेगी। प्रभावित क्षेत्र से संपर्क बहाल होने के साथ कुछ लोगों के सुरक्षित होने की जानकारी भी सामने आ सकती है।

नेपाल के 104 नागरिक लापता

विदेशी नागरिकों में सबसे अधिक संख्या नेपाली नागरिकों की बताई गई है। 104 नेपाली नागरिकों का पता नहीं चलने से नेपाल में भी चिंता बढ़ी हुई है।

नेपाल और तिब्बत के बीच यह सीमावर्ती क्षेत्र व्यापार और यात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बाढ़ और भूस्खलन से संपर्क प्रभावित होने का असर दोनों तरफ के लोगों पर पड़ा है।

राहत और तलाश अभियान पर नजर

अब सबसे अधिक ध्यान लापता लोगों की तलाश पर है। प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, रास्ते खोलने और लोगों तक पहुंचने का काम बेहद महत्वपूर्ण है।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और मौसम की स्थिति अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। जहां संभव है वहां बचाव दलों को मलबे और क्षतिग्रस्त इलाकों की जांच करनी होगी।

बढ़ सकता है आपदा का दायरा

फिलहाल सामने आए आंकड़ों के अनुसार 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। हालांकि इतने बड़े स्तर पर जारी खोज अभियान के कारण आने वाले दिनों में आंकड़ों में बदलाव संभव है।

लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिकों की मौजूदगी ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया है। इनमें नेपाल के 104, भारत के 49, लातविया के 33, अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक प्रमुख रूप से शामिल हैं।

आपदा के छह दिन बाद भी सैकड़ों परिवार अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। अब राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित क्षेत्रों तक संपर्क बहाल करना है।

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