Gonda | गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक महिला ने अपने नवाचार और मेहनत से अलग पहचान बनाई है। यहां किरन मिश्रा ने घर पर ही गन्ने के रस से जैविक सिरका तैयार करने की पहल शुरू की है, जो अब आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बन गया है। उनकी यह कोशिश न सिर्फ एक घरेलू प्रयोग के रूप में देखी जा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नए अवसर के रूप में भी सामने आ रही है।
किरन मिश्रा द्वारा तैयार किया जा रहा यह सिरका पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से बनाया जाता है। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता। वे गन्ने के रस को पारंपरिक और प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार कर सिरका बनाती हैं, जिससे इसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहतर माने जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह उत्पाद स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभकारी बताया जा रहा है।
लोकल 18 से बातचीत के दौरान किरन मिश्रा ने बताया कि जैविक सिरका न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, बल्कि यह किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा साधन भी बन सकता है। उनका कहना है कि यदि इसे सही तरीके से तैयार किया जाए और उचित पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जाए, तो इसकी मांग स्थानीय स्तर के साथ-साथ ऑनलाइन बाजार में भी बढ़ सकती है।
उनकी इस पहल से आसपास के कई किसान और महिलाएं प्रेरित हो रही हैं। कई लोग उनके पास सिरका बनाने की विधि सीखने के लिए पहुंच रहे हैं। किरन मिश्रा लोगों को इसकी प्रक्रिया समझा रही हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
किरन का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करके छोटे स्तर पर भी अच्छा व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। गन्ना, जो कि इस क्षेत्र की प्रमुख फसल है, उससे तैयार होने वाला यह सिरका किसानों के लिए एक वैकल्पिक आय का साधन बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर इस पहल को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है, बल्कि गांवों में छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ऐसे उत्पादों को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाजार की सुविधा मिले तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।