दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा, टोंस नदी में डूबने से चाचा-भतीजे की मौत
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में विजयादशमी के अवसर पर मूर्ति विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। कौंधियारा थाना क्षेत्र के देवरा पटपर घाट पर मंगलवार सुबह टोंस नदी में डूबने से चाचा और भतीजे की मौत हो गई। दोनों मूर्ति विसर्जन के लिए घाट पर पहुंचे थे। इसी दौरान नदी में गहरे पानी में चले जाने से दोनों डूब गए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। घटना की सूचना मिलते ही कौंधियारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों की तलाश के लिए बचाव अभियान शुरू कराया। पुलिस ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को सूचना देने के साथ स्थानीय गोताखोरों को नदी में उतारा। कई घंटे तक चली तलाश के बाद दोपहर करीब दो बजे दोनों के शव बरामद कर लिए गए। इस दर्दनाक घटना से परिजनों में कोहराम मच गया और धार्मिक उत्सव की खुशियां मातम में बदल गईं।
मूर्ति विसर्जन के दौरान नदी में डूबे चाचा-भतीजे
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह कौंधियारा थाना क्षेत्र के देवरा पटपर घाट पर मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने पहुंचे थे।
श्रद्धालु विधि-विधान के साथ मूर्ति विसर्जन कर रहे थे। इसी बीच चाचा और भतीजा नदी में उतर गए। बताया जा रहा है कि दोनों अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।
दोनों को डूबता देखकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया। कुछ लोगों ने तत्काल उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन नदी के पानी में उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
देखते ही देखते दोनों पानी में ओझल हो गए। इस घटना के बाद घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई।
आसपास मौजूद लोगों ने किया बचाने का प्रयास
घटना के समय घाट पर अन्य लोग भी मौजूद थे। चाचा-भतीजे को डूबता देखकर लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की।
हालांकि, पानी की गहराई और नदी की परिस्थितियों के कारण वे दोनों तक नहीं पहुंच सके।
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और स्थानीय स्तर पर दोनों की तलाश शुरू की गई।
घटना की खबर आसपास के गांवों में भी फैल गई। कुछ ही देर में घाट पर लोगों की भीड़ जुटने लगी।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
हादसे की जानकारी मिलने के बाद कौंधियारा थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और डूबे हुए दोनों लोगों की तलाश के लिए बचाव कार्य शुरू कराया।
पुलिस ने एसडीआरएफ को घटना की सूचना दी। इसके साथ ही स्थानीय गोताखोरों की मदद ली गई।
नदी में डूबे लोगों की तलाश के लिए गोताखोरों ने विभिन्न स्थानों पर खोजबीन की।
नदी में पानी की गहराई और बहाव के कारण इस प्रकार के बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण होते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित गोताखोरों की सहायता महत्वपूर्ण होती है।
दोपहर दो बजे मिले दोनों के शव
मंगलवार सुबह हुई घटना के बाद कई घंटे तक चाचा-भतीजे की तलाश जारी रही।
स्थानीय गोताखोर लगातार नदी में खोजबीन करते रहे। आखिरकार दोपहर करीब दो बजे दोनों के शव पानी से बरामद कर लिए गए।
दोनों के शव बाहर निकाले जाने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। जिस धार्मिक कार्यक्रम में परिवार के सदस्य उत्साह के साथ पहुंचे थे, वहीं हुई दुर्घटना ने उन्हें गहरे दुख में डाल दिया।
फिलहाल मृतकों के नाम और उम्र की विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मूर्ति विसर्जन के बाद स्नान करने की भी जानकारी
घटना से संबंधित एक समाचार रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों युवक मूर्ति विसर्जन के बाद टोंस नदी में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
हालांकि, दोनों किस स्थान पर नदी में उतरे थे और अचानक गहरे पानी में जाने की परिस्थितियां क्या थीं, इसका विस्तृत विवरण स्पष्ट नहीं है।
पुलिस जांच में घटना से जुड़े इन तथ्यों की जानकारी सामने आ सकती है।
देवरा पटपर घाट पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
कौंधियारा क्षेत्र का देवरा पटपर घाट धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
टोंस नदी के किनारे स्थित यह स्थान आसपास के लोगों के लिए धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां प्राचीन पाटलेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है।
गर्मियों और धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में लोग नदी किनारे पहुंचते हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में पहले भी नदी में डूबने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जून 2024 में देवरा पटपर क्षेत्र में नहाने गए एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी।
उस समय भी स्थानीय गोताखोरों की सहायता से शव बरामद किया गया था।
विसर्जन घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था का महत्व
दुर्गा पूजा और विजयादशमी के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा विसर्जन के लिए नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों के पास पहुंचते हैं।
ऐसे आयोजनों में घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और बचाव दल की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी में पानी की गहराई कई स्थानों पर अचानक बढ़ सकती है। पानी के भीतर पत्थर, फिसलन और तेज बहाव जैसी परिस्थितियां भी खतरा पैदा कर सकती हैं।
इसलिए प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही रहना चाहिए।
गहरे पानी में उतरने से बचना और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
धार्मिक उत्सव की खुशियां मातम में बदलीं
विजयादशमी के अवसर पर मूर्ति विसर्जन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था और उत्साह का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
लेकिन प्रयागराज के देवरा पटपर घाट पर हुई इस घटना ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।
चाचा और भतीजे की एक साथ मौत से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। दोनों को बचाने के लिए लोगों ने प्रयास किया, लेकिन उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
नदी में डूबने की घटनाओं से बचाव जरूरी
इस हादसे ने एक बार फिर नदियों और अन्य जलस्रोतों के पास विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता सामने रखी है।
धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, प्रशिक्षित गोताखोर और आपातकालीन बचाव उपकरण उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से बच्चों और तैरना नहीं जानने वाले लोगों को गहरे पानी के आसपास जाने से रोकना चाहिए।
फिलहाल कौंधियारा थाना क्षेत्र के देवरा पटपर घाट पर डूबे दोनों लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस की आगे की कानूनी प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।