उत्तर प्रदेश :आगरा में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय हाईटेक वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लग्जरी कारों की चोरी को अपना पेशा बना लिया था। यह गिरोह सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम को हैक कर बिना किसी शोर-शराबे के गाड़ियों को चंद मिनटों में गायब कर देता था। पुलिस ने इस गैंग के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 1.86 करोड़ रुपये कीमत की 11 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। जांच में सामने आया है कि गैंग ऑन-डिमांड वाहन चोरी करता था और चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्यों में बेच देता था।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के अनुसार, मामले की शुरुआत 29 जून को जयपुर हाउस क्षेत्र से चोरी हुई एक होंडा डब्ल्यूआरवी कार की शिकायत से हुई थी। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें पता चला कि वाहन चोर खुद कार से आए थे और बेहद हाईटेक तरीके से चोरी को अंजाम दिया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि गाड़ी का सेंट्रल लॉक अलार्म तक नहीं बजा। चोरी के बाद आरोपियों ने कार में लगी जीपीएस डिवाइस भी निकालकर रास्ते में फेंक दी, ताकि पुलिस वाहन की लोकेशन ट्रैक न कर सके।
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के सरगना अभिषेक वाजपेई उर्फ सत्यम के बारे में जानकारी मिली। हालांकि कुछ दिन पहले पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह अपनी महिला मित्र के साथ कार में सवार होकर भाग निकला। पुलिस की घेराबंदी के दौरान उसने कार को बैक गियर में दौड़ा दिया और फिर दूसरी कार में बैठकर फरार हो गया। पूछताछ में उसकी महिला मित्र ने केवल कुछ मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए और बताया कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि अभिषेक वाहन चोरी के गिरोह से जुड़ा हुआ है।
गिरोह की तलाश में पुलिस की टीम हरदोई, बस्ती, लखनऊ, सीतापुर और अन्य जिलों तक पहुंची। जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग केवल आगरा ही नहीं, बल्कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, हरियाणा और मथुरा जैसे शहरों से भी लग्जरी गाड़ियों की चोरी करता था। आरोपियों के खिलाफ कई राज्यों में वाहन चोरी और अन्य आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड भी मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में विवेक रावत सबसे शातिर अपराधी है। उसके खिलाफ बरेली, लखनऊ, हरदोई और कुशीनगर समेत कई जिलों में एक दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पूछताछ में पुलिस को चोरी के पूरे नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर गाड़ियों की सुरक्षा प्रणाली को निष्क्रिय किया जाता था।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी पहले उसी मॉडल की दुर्घटनाग्रस्त या 'टोटल लॉस' घोषित कार खरीदते थे। इसके बाद चोरी की गई गाड़ी पर उस वाहन का इंजन और चेसिस नंबर वेल्डिंग के जरिए लगा दिया जाता था, जिससे वाहन पूरी तरह वैध दिखाई देने लगता था। इसके बाद उसे दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, चोरी की अधिकांश गाड़ियां बस्ती जिले के एसडी कार बाजार के माध्यम से बेची जाती थीं। इस कारोबार में संतोष कुमार नामक आरोपी की अहम भूमिका सामने आई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गैंग आधुनिक कारों के सिक्योरिटी सिस्टम को हैक करने में माहिर था। आरोपी कार के स्टीयरिंग के नीचे मौजूद ओबीडी (ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक) पोर्ट में विशेष प्रोग्रामिंग डिवाइस लगाते थे। इसके जरिए वाहन की चाबी और इम्मोबिलाइजर सिक्योरिटी चिप का पूरा डेटा कॉपी कर लिया जाता था। कई मामलों में रिमोट का क्लोन भी तैयार किया जाता था। इसके बाद लैपटॉप और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम का सायरन बंद कर दिया जाता और गाड़ी आसानी से स्टार्ट कर ली जाती थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो टाटा हैरियर, होंडा सिटी, महिंद्रा थार, होंडा डब्ल्यूआरवी, किआ कैरेंस, हुंडई वरना, फोर्ड इकोस्पोर्ट, हुंडई आई-20 और टाटा पंच समेत कुल 11 वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा 19 वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी), 13 हजार रुपये नकद और नौ मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि गिरोह ने अब तक कितनी गाड़ियां चोरी कर बाजार में बेची हैं, इसका सही आंकड़ा खुद आरोपियों को भी याद नहीं है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से अंतरराज्यीय वाहन चोरी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।