वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने और मुख्य शिखर के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की खबरों को लेकर मंदिर प्रशासन ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को स्थिति स्पष्ट की है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इन खबरों को निराधार और भ्रामक बताया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, अप्रैल 2026 में प्राकृतिक कारणों से मुख्य मंदिर के शिखर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। उस हिस्से को सुरक्षित निकालकर मंदिर के लॉकर में रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संबंधित स्वर्ण कलश या क्षतिग्रस्त हिस्से के गायब होने की बात सही नहीं है।मंदिर प्रशासन की इस सफाई के बाद शिखर से सोना गायब होने के दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से के संरक्षण तथा मरम्मत के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है।
अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हुआ था शिखर का हिस्सा
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, अप्रैल 2026 में मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य यानी उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित शिखर का एक हिस्सा प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हो गया था।रिपोर्ट के अनुसार, उस समय ओलावृष्टि के दौरान शिखर को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित कर लिया गया।मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस घटना को लेकर अब सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि क्षति एक विशेष हिस्से में हुई थी। मंदिर का मुख्य शिखर पूरी तरह ढह जाने का दावा सही नहीं है।
मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया क्षतिग्रस्त हिस्सा
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र ने बताया कि अप्रैल में क्षतिग्रस्त हुए शिखर के हिस्से को मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है।उन्होंने कहा कि स्वर्ण शिखर से सोना गायब होने की खबरें गलत और भ्रामक हैं। संबंधित हिस्सा मंदिर प्रशासन की सुरक्षित अभिरक्षा में मौजूद है।प्रशासन के मुताबिक, क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित रखने का उद्देश्य उसकी मूल स्थिति बनाए रखना है, ताकि भविष्य में विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उसका संरक्षण और मरम्मत कराई जा सके।मंदिर न्यास ने लोगों से भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील भी की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी शिकायत
काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों को लेकर वाराणसी के अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत की थी।यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि मंदिर के स्वर्ण शिखर पर लगे कुछ कलश गायब हैं।इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया। मंदिर प्रशासन ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए संबंधित स्वर्ण कलश के सुरक्षित होने की जानकारी दी।हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों और मंदिर प्रशासन के स्पष्टीकरण को अलग-अलग समझना आवश्यक है। केवल शिकायत दर्ज होने से सोना चोरी होने की पुष्टि नहीं होती।
IIT मद्रास के विशेषज्ञ करेंगे तकनीकी परीक्षण
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने बताया कि क्षतिग्रस्त शिखर के संरक्षण और मरम्मत के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास से तकनीकी परामर्श लिया जा रहा है।मंदिर की मूल संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करना प्रशासन की प्राथमिकता है।इसके लिए विशेषज्ञों से तकनीकी परीक्षण और आवश्यक सुझाव प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।प्रशासन का कहना है कि मंदिर की धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए ही संरक्षण संबंधी कार्य किए जाएंगे।विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की मरम्मत और पुनर्स्थापना से संबंधित निर्णय लिया जाएगा।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए सावधानी
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ का विशेष स्थान माना जाता है।यह मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है।मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। इसलिए शिखर के क्षतिग्रस्त हिस्से को तत्काल बदलने के बजाय विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह प्राप्त की जा रही है।इसका उद्देश्य मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित बनाए रखना है।
अफवाहों पर मंदिर प्रशासन ने दिया स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में प्रसारित खबरों के बाद मंदिर न्यास ने स्पष्ट किया है कि स्वर्ण शिखर का क्षतिग्रस्त हिस्सा सुरक्षित है।प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि मंदिर का मुख्य शिखर किसी बड़े हादसे में पूरी तरह ढह गया या उसका सोना गायब हो गया।फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और संरक्षण के लिए तकनीकी परामर्श की प्रक्रिया चल रही है।मंदिर न्यास के अनुसार, विशेषज्ञों की सलाह मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि काशी विश्वनाथ मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखा जा सके।