हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में किसानों को नकली खाद बेचकर ठगने के कथित मामले में कृषि विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पिहानी थाना क्षेत्र के जहानीखेड़ा स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र और संबंधित गोदाम पर छापेमारी कर 820 बोरी संदिग्ध डीएपी खाद बरामद की गई है। यह खाद हरियाणा के हिसार से ट्रक में लादकर लाई गई थी। जांच के दौरान खाद की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। मामले में प्रतिष्ठान के संचालक समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसटीएफ ने लखीमपुर खीरी निवासी अखिलेश कुमार को गिरफ्तार किया है। बरामद खाद के आठ नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। इससे पहले जिले के सुरसा क्षेत्र में भी इसी ब्रांड के नाम पर बेची जा रही खाद पकड़ी गई थी, जो जांच में नकली निकली थी।

एसटीएफ की सूचना पर कृषि विभाग ने मारा छापा

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश एसटीएफ को प्रदेश के विभिन्न जिलों में नकली डीएपी खाद की आपूर्ति किए जाने की सूचना मिल रही थी।

इसी क्रम में 16 अक्टूबर को एसटीएफ को जानकारी मिली कि हरियाणा से संदिग्ध खाद की एक बड़ी खेप हरदोई के पिहानी क्षेत्र में पहुंची है।

एसटीएफ ने जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक से संपर्क किया। इसके बाद कृषि विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने जहानीखेड़ा स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र तथा संबंधित गोदाम का निरीक्षण किया।

छापेमारी के दौरान टीम को एक ट्रक से खाद की बोरियां उतारी जाती मिलीं।

अधिकारियों ने खाद से संबंधित दस्तावेजों की जांच की तो कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद खाद की बोरियों को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

गोदाम और ट्रक से मिलीं 820 बोरियां

जांच टीम को हरियाली किसान सेवा केंद्र के गोदाम में पहले से रखी भारत डीएपी ब्रांड की 45 बोरियां मिलीं।

इसके अतिरिक्त ट्रक से उतारी जा रही 775 बोरियां बरामद की गईं। इस प्रकार कुल 820 बोरियां जब्त की गईं।

सभी बोरियों में खाद के नाम पर सामग्री भरी हुई थी। अधिकारियों को इसकी गुणवत्ता और वास्तविकता पर संदेह हुआ।

मौके से अन्य कृषि उत्पाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों से संबंधित सामग्री भी जांच के दायरे में ली गई।

कृषि विभाग ने बरामद खाद के आठ नमूने प्रयोगशाला भेजे हैं। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जब्त सामग्री की गुणवत्ता क्या है और वह निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।

हरियाणा के हिसार से मंगाई गई थी खाद

एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध खाद की खेप हरियाणा के हिसार से मंगाई गई थी।

बरामद माल को भारत डीएपी और भूमि क्रांति डीएपी जैसे ब्रांड नामों के तहत भेजे जाने की जानकारी मिली है।

जांच एजेंसी के अनुसार, माल हिसार स्थित श्री कृष्ण सुदामा एग्रो ट्रेडिंग नाम की फर्म से मंगाया गया था।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खाद वास्तव में कहां तैयार की गई थी और उसकी आपूर्ति किन-किन स्थानों पर की जानी थी।

इसके साथ ही संबंधित फर्म के व्यापारिक रिकॉर्ड और माल की ढुलाई से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

ई-वे बिल में मिला चौंकाने वाला अंतर

इस पूरे मामले में ई-वे बिल की जानकारी ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा है।

एसटीएफ के अनुसार, खाद की खेप से संबंधित ई-वे बिल में सामग्री को डीएपी के बजाय 'रॉ ग्रेन्यूल्स' बताया गया था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दस्तावेजों में माल को हरियाणा के हिसार से ओडिशा भेजे जाने का विवरण दर्ज था।

जबकि वास्तविकता में यह खेप उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में उतारी जा रही थी।

दस्तावेजों में दर्ज गंतव्य और वास्तविक आपूर्ति स्थल अलग होने से अधिकारियों को अनियमितता का संदेह हुआ।

एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि दस्तावेजों में गलत जानकारी जानबूझकर दर्ज की गई थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

अखिलेश कुमार को किया गया गिरफ्तार

छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले अखिलेश कुमार को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में अखिलेश ने बताया कि हरियाली किसान सेवा केंद्र का प्रोपराइटर कुलदीप सिंह है, जबकि केंद्र का संचालन रजनीश सिंह करता है।

उसने कथित तौर पर बताया कि रजनीश सिंह के कहने पर हिसार से खाद मंगाई गई थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, अखिलेश संबंधित खेप को उतरवाने के काम से जुड़ा था।

हालांकि, उसके बयान और मामले में अन्य व्यक्तियों की कथित भूमिका की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

संचालक समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज

जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

मामले में हरियाली किसान सेवा केंद्र के प्रोपराइटर कुलदीप सिंह, रजनीश सिंह, अखिलेश कुमार और हिसार की संबंधित फर्म से जुड़े कृष्ण सुदामा को नामजद किया गया है। आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।

पुलिस और एसटीएफ खाद की आपूर्ति, बिक्री तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी बिल और अन्य सामान भी बरामद

एसटीएफ की टीम ने खाद की बोरियों के अतिरिक्त मौके से कई दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए हैं।

इनमें कथित फर्जी बिल-वाउचर, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड और अन्य सामग्री शामिल हैं।

जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के माध्यम से खाद की खरीद और बिक्री से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

मोबाइल फोन तथा व्यापारिक दस्तावेजों की जांच से संभावित आपूर्ति नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है।

एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि संदिग्ध खाद पहले किन स्थानों पर भेजी गई थी।

सुरसा में भी पकड़ी गई थी इसी नाम की खाद

हरदोई जिले के सुरसा क्षेत्र में इससे पहले भी संदिग्ध डीएपी खाद की बरामदगी हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, उस समय पकड़ी गई खाद भी इसी ब्रांड के नाम से बेची जा रही थी।

प्रयोगशाला जांच में संबंधित खाद नकली पाई गई थी।

इसके बाद नए मामले में उसी ब्रांड के नाम पर बड़ी मात्रा में खाद मिलने से जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

हालांकि, दोनों मामलों में एक ही आपूर्ति नेटवर्क शामिल था या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

किसानों की फसलों को हो सकता था नुकसान

डीएपी खाद का इस्तेमाल खेती में फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है।

यदि किसानों को निर्धारित गुणवत्ता के बजाय नकली या अमानक खाद बेची जाती है, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

खराब गुणवत्ता वाली खाद का इस्तेमाल फसल की वृद्धि और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

इसलिए खाद की गुणवत्ता की नियमित जांच और अवैध बिक्री रोकना आवश्यक है।

कृषि विभाग की इस कार्रवाई को किसानों के हितों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी एसटीएफ

820 बोरी संदिग्ध डीएपी की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियां अब इसकी आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

एसटीएफ यह जानना चाहती है कि खाद कहां तैयार की गई, किन लोगों ने इसकी आपूर्ति की और इसे किन बाजारों में बेचने की योजना थी।

इसके साथ ही अन्य जिलों में भी इसी तरह की खाद की बिक्री हुई है या नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार है और चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

बरामद सामग्री की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद खाद की वास्तविक गुणवत्ता और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

Tags: