लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें आधुनिक तकनीक के अनुरूप हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ सरकार ने 1725 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्किल और रोजगार जोन विकसित करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का दावा है कि इस पहल से युवाओं को केवल व्यावसायिक प्रशिक्षण ही नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पहले चरण में पांच जिलों से इसकी शुरुआत होगी।
उत्तर प्रदेश में रोजगार और कौशल विकास लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। हर साल बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन कई बार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव की कमी उनके सामने चुनौती बन जाती है। इसी अंतर को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्किल और रोजगार जोन विकसित करने की योजना तैयार की है। इसके माध्यम से युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार प्रशिक्षण देने तथा रोजगार के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका विस्तार प्रदेश के सभी 75 जिलों तक करने का लक्ष्य है। इसका मतलब है कि भविष्य में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी अपने जिले में कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं। वर्तमान में कई युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार की तलाश में लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद तथा दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। जिला स्तर पर स्किल और रोजगार जोन विकसित होने से प्रशिक्षण के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
पहले चरण में पांच जिलों से होगी शुरुआत
सरकार की योजना के अनुसार, स्किल और रोजगार जोन का विकास एक साथ सभी जिलों में नहीं किया जाएगा। पहले चरण में पांच जिलों में इसकी शुरुआत करने की तैयारी है। इन जिलों में योजना के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण व्यवस्था और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके बाद अनुभव और आवश्यकताओं के आधार पर अन्य जिलों तक योजना का विस्तार किया जा सकेगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पहले चरण के लिए चयनित पांच जिलों के नाम स्पष्ट नहीं किए गए हैं। ऐसे में युवाओं को संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा। योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन, प्रवेश प्रक्रिया और उपलब्ध पाठ्यक्रमों की जानकारी भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
युवाओं को किस तरह की ट्रेनिंग मिल सकती है?
स्किल और रोजगार जोन विकसित करने का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अनुकूल कौशल उपलब्ध कराना है। ऐसे केंद्रों में उद्योगों की मांग के अनुसार तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा सकती है। आईटी, कंप्यूटर संचालन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन संचालन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल कार्य, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और सेवा क्षेत्र जैसे विषय कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इसके अलावा डिजिटल तकनीक, संचार कौशल, साक्षात्कार की तैयारी और कार्यस्थल से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी रोजगार पाने में युवाओं की मदद कर सकती है। हालांकि, इस विशेष योजना में कौन-कौन से पाठ्यक्रम संचालित होंगे, उनकी अवधि कितनी होगी और प्रशिक्षण के लिए क्या योग्यता निर्धारित की जाएगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
नौ जोन में बांटा जाएगा पूरा प्रदेश
योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 75 जिलों को नौ विशेष रोजगार जोन में बांटा जाएगा। प्रत्येक जोन में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सरकार ने इस परियोजना पर तीन वर्षों में 1725 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान लगाया है। पहले चरण के लिए लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, झांसी और गौतमबुद्ध नगर का चयन किया गया है। इसके बाद सभी 18 मंडल मुख्यालयों और फिर शेष जिलों तक योजना का विस्तार किया जाएगा।
हाईस्कूल पास युवाओं को भी मिलेगा अवसर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, हाईस्कूल पास युवा भी इन केंद्रों पर पंजीकरण कराकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी। इसके अलावा आर्ट्स और कॉमर्स पृष्ठभूमि के युवाओं को भी रोजगारपरक प्रशिक्षण देने की योजना है।
इन केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस और भारतीय तथा विदेशी भाषाओं से जुड़े प्रशिक्षण की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। विदेश में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए संबंधित देशों की भाषाएं सिखाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण केंद्रों में छात्रावास, सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
योजना के तहत प्रशिक्षण के साथ रोजगार सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। सरकार ने टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स, अशोक लीलैंड सहित कई संस्थाओं के साथ सहयोग की पहल की है। इन संस्थाओं की भागीदारी से युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को नौकरी मिलने की गारंटी की पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार का लक्ष्य युवाओं को स्थानीय उद्योगों के साथ-साथ देश और विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने युवा प्रशिक्षण पूरा करते हैं और उनमें से कितनों को वास्तविक रोजगार प्राप्त होता है।
फिलहाल आवेदन की अंतिम तिथि, पाठ्यक्रमवार फीस, प्रशिक्षण अवधि और चयन प्रक्रिया के विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट होने बाकी हैं। इच्छुक युवाओं को आधिकारिक सूचना के आधार पर ही आवेदन करना चाहिए।