अयोध्या :  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने पूर्व महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) को शिकायत भेजी है। महिपाल सिंह ने अपनी शिकायत में 20 अलग-अलग बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज, मंदिर निर्माण लागत, दान राशि के प्रबंधन और संपत्तियों की खरीद से जुड़े कई मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

महिपाल सिंह ने 27 जुलाई को ई-मेल के माध्यम से एसआईटी को अपनी शिकायत भेजी। इससे पहले 26 जुलाई को कमिश्नर लखनऊ और पहली एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने उनसे मामले से जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद महिपाल सिंह ने लिखित रूप से अपनी शिकायत और आरोपों का विवरण जांच एजेंसी को सौंपा।

शिकायत में महिपाल सिंह ने चंपत राय, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, कुछ बैंक कर्मचारियों और अन्य लोगों के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एसआईटी से मांग की है कि शिकायत में शामिल सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कराई जाए और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

महिपाल सिंह ने मंदिर निर्माण की लागत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शुरुआत में राम मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर लगभग 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने जांच की मांग करते हुए कहा कि जब मंदिर का डिजाइन, स्वरूप और निर्माण योजना पहले से तय थी, तो लागत में इतनी बड़ी वृद्धि किन कारणों से हुई, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए।

पूर्व लेखा प्रभारी ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान कई ऐसे स्थायी निर्माण कराए गए, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी। उनका दावा है कि कुछ काम अस्थायी व्यवस्थाओं से भी पूरे किए जा सकते थे, लेकिन इन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। उन्होंने इन खर्चों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।

दान राशि के प्रबंधन को लेकर भी महिपाल सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दान में मिलने वाली रकम की गिनती और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित संख्या से अधिक नोटों की गड्डियां परिसर से बाहर भेजी जाती थीं। शिकायत में दावा किया गया है कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से कभी-कभी तय संख्या से ज्यादा गड्डियां भेजी गईं। महिपाल सिंह के अनुसार उन्होंने इस संबंध में पहले भी चंपत राय को जानकारी दी थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई कुछ संपत्तियां विवादित हैं और उनके मामले न्यायालय में लंबित हैं। महिपाल सिंह का दावा है कि ऐसी खरीदारी से ट्रस्ट को आर्थिक नुकसान हुआ है और इसकी जांच जरूरी है।

शिकायत में चांदी के झूले से जुड़ा एक आरोप भी लगाया गया है। महिपाल सिंह ने कहा कि 150 किलोग्राम चांदी से झूला तैयार कराने का आदेश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर इसमें केवल 85 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इस मामले में भी जांच की मांग की है।

इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय के निवास भारत कुटी में बिना रसीद के चढ़ावा प्राप्त किया गया। उन्होंने कारसेवकपुरम स्थित विश्व हिंदू परिषद कार्यालय में आयोजित कुछ कार्यक्रमों के खर्च को भी ट्रस्ट के धन से जोड़े जाने का आरोप लगाया और इसकी जांच की मांग की।

इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर एसआईटी को दस्तावेज सौंप चुके हैं। उन्होंने भी ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर आरोप लगाए थे।

हालांकि, लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एसआईटी अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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