जिंदा महिला को मिला राशन का हक, HC ने दिया आदेश

Update: 2026-08-01 14:27 GMT

प्रयागराज: रहने वाली चंदा देवी को आखिरकार न्याय मिल गया है। सरकारी रिकॉर्ड में गलती से मृत घोषित कर दिए जाने के कारण उनका पूरा परिवार कई महीनों से राशन से वंचित था। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को परिवार का राशन कार्ड बहाल करने और सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ के सामने प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और जिला आपूर्ति अधिकारी सुनील सिंह पेश हुए। अधिकारियों ने कोर्ट में अपनी गलती स्वीकार की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीन अगस्त तक चंदा देवी के पूरे परिवार का राशन कार्ड बहाल कर संशोधित कार्ड उपलब्ध कराया जाए।

हाई कोर्ट ने कहा कि राशन कार्ड की प्रक्रिया में हुई गलती के कारण पूरे परिवार को परेशान होना पड़ा। अदालत ने निर्देश दिया कि जिला आपूर्ति निरीक्षक स्वयं आवश्यक दस्तावेज लेकर परिवार की यूनिट को दोबारा जोड़ेंगे और नया राशन कार्ड जारी करेंगे।

मामला प्रयागराज के यमुनापार क्षेत्र की हंडिया तहसील के वारी गांव का है। चंदा देवी के पति साधु राम की मृत्यु 25 जनवरी 2021 को हो गई थी। आरोप है कि तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक नंद किशोर यादव ने पति की केवल एक यूनिट हटाने के बजाय पूरे परिवार की छह यूनिट ही राशन कार्ड से काट दी।

इसके पीछे कारण बताया गया कि राशन कार्ड की मुखिया चंदा देवी की भी मृत्यु हो चुकी है, जबकि वास्तविकता में वह जीवित थीं। सरकारी रिकॉर्ड में हुई इस गलती के कारण चंदा देवी और उनका परिवार कई महीनों तक सरकारी राशन योजना के लाभ से वंचित रहा।

चंदा देवी ने अपनी समस्या को लेकर कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने मजबूर होकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी, जिला आपूर्ति अधिकारी और ग्राम प्रधान को तलब किया था।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी और जिला आपूर्ति अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने गलती स्वीकार करते हुए बताया कि 31 जुलाई 2026 को चंदा देवी के नाम से एक यूनिट वाला नया अस्थायी राशन कार्ड जारी कर दिया गया है। डीएम ने चंदा देवी का मूल आधार कार्ड भी उन्हें सौंपा।

कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चंदा देवी जब परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड उपलब्ध करा देंगी, तो 24 घंटे के भीतर सभी सदस्यों की यूनिट जोड़कर नया राशन कार्ड जारी किया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जिस अवधि में परिवार को राशन नहीं मिला है, उसे निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराया जाए।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक बड़ी प्रशासनिक भूल है। परिवार के एक सदस्य की मृत्यु होने पर मुखिया को ही मृत मान लेना और पूरे परिवार की यूनिट काट देना गंभीर लापरवाही है।

मामले में कोर्ट को जानकारी दी गई कि तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक नंद किशोर यादव को किसी अन्य मामले में निलंबित किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने कहा कि उसकी कार्रवाई में कोई रुचि नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले से चंदा देवी और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम की गलती का खामियाजा भुगतने के बाद अब परिवार को दोबारा राशन योजना का लाभ मिल सकेगा।

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