धर्म के अनुसार हुआ तीन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार, संस्था की सराहना

Update: 2026-07-29 16:08 GMT

मुरादाबाद :  उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मानवता, सामाजिक जिम्मेदारी और सांप्रदायिक सौहार्द की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन ने तीन लावारिस शवों का उनके-अपने धर्म के अनुसार पूरे सम्मान और विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर यह संदेश दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। संस्था ने दो हिंदू शवों का अंतिम संस्कार लालबाग श्मशान घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ कराया, जबकि एक मुस्लिम शव को झब्बू का नाला स्थित सरकारी कब्रिस्तान में इस्लामी परंपरा के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

जानकारी के अनुसार, कटघर थाना, कोतवाली थाना और जीआरपी थाना क्षेत्र से पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर तीन लावारिस शव बरामद हुए थे। शव मिलने के बाद पुलिस ने नियमानुसार उनकी पहचान कराने और परिजनों का पता लगाने का हरसंभव प्रयास किया। करीब 72 घंटे तक आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई गई, थानों में रिकॉर्ड खंगाले गए और संभावित परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी मृतक की पहचान नहीं हो सकी।

जब निर्धारित समय सीमा तक कोई परिजन सामने नहीं आया और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गईं, तब पुलिस ने तीनों शव ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन को सौंप दिए। इसके बाद संस्था के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने बिना किसी भेदभाव के मृतकों के धर्म का पता लगाकर उनके अनुरूप अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।

संस्था के स्वयंसेवक सबसे पहले दो हिंदू शवों को लालबाग श्मशान घाट लेकर पहुंचे। वहां धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय से संबंधित शव को झब्बू का नाला स्थित सरकारी कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार जनाजे की आवश्यक रस्में पूरी करने के बाद उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान संस्था के सदस्य पूरे समय मौजूद रहे और सभी धार्मिक परंपराओं का सम्मानपूर्वक पालन किया गया।

ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन लंबे समय से ऐसे लावारिस, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कार्य कर रही है। संस्था का मानना है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिलना उसका मानवीय अधिकार है। यही सोच संस्था को ऐसे कार्यों के लिए प्रेरित करती है। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि किसी मृतक का कोई अपना नहीं होता, तब समाज को आगे आकर उसकी अंतिम यात्रा सम्मानपूर्वक पूरी करनी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों ने भी संस्था के इस कार्य की सराहना की। उनका कहना है कि लावारिस शवों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामाजिक संगठनों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे मृतकों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिल पाता है और प्रशासन का कार्य भी सुचारु रूप से संपन्न होता है।

स्थानीय लोगों ने भी इस मानवीय पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में जब लोग अपने परिचितों तक की मदद करने से पीछे हट जाते हैं, ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के लिए इस प्रकार का कार्य करना समाज के लिए प्रेरणादायक है। लोगों का मानना है कि धर्म, जाति और पहचान से ऊपर उठकर इंसानियत के लिए काम करने वाले ऐसे संगठन सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार केवल एक सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक भी है। इससे यह संदेश जाता है कि समाज में हर व्यक्ति का सम्मान समान है, चाहे उसकी पहचान हो या न हो।

मुरादाबाद में ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया गया यह कार्य मानवता, सामाजिक सेवा और धार्मिक सद्भाव का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। संस्था की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव न हो और हर व्यक्ति को सम्मान देने की भावना सर्वोपरि हो। यह घटना समाज को इंसानियत, करुणा और आपसी भाईचारे का मजबूत संदेश देती है।

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