मथुरा: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में शुक्रवार, 6 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 7 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। याचिका में पूरे मामले की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने और मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। वृंदावन के वाराह घाट क्षेत्र स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम में 26 सितंबर को रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत हुई थी। घटना के बाद से ही मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों की जानकारी सामने आने के बाद परिजनों और याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग उठाई थी।
इस मामले में वृंदावन के बागबुंदेला निवासी अधिवक्ता प्रह्लाद कृष्ण शुक्ल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दावा किया कि मौत के कई दिन बीत जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। हालांकि, ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 48 में न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ के समक्ष निर्धारित थी। लेकिन संबंधित पीठ के नहीं बैठने के कारण मामला कोर्ट नंबर 46 में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 7 दिसंबर की तारीख तय की है। रिपोर्ट के अनुसार, मामले को अगली सुनवाई के लिए शीर्ष दस नए मामलों की सूची में शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई चोटों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, मृतक के सिर, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों के निशान पाए गए थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। अधिवक्ता प्रह्लाद कृष्ण शुक्ल का कहना है कि उन्होंने 2 अक्टूबर को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर मुख्य सचिव गृह और जिलाधिकारी को भी पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे पहले पुलिस ने घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच शुरू की थी। पुलिस ने मृतक के कमरे से मिले मोबाइल फोन, डायरी और अन्य सामान की जांच की। घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और नमूने भी एकत्र किए गए थे। साथ ही आश्रम में रहने वाले अन्य लोगों से पूछताछ की गई थी।
मृतक के परिजनों ने भी मौत की परिस्थितियों को लेकर संदेह व्यक्त किया है। परिवार का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दीपक लोधी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल हाईकोर्ट में दाखिल याचिका का मुख्य उद्देश्य मामले की एसआईटी जांच और मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाना है। अदालत ने अभी इन मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। इस दौरान अदालत के समक्ष जांच से जुड़े तथ्यों और याचिकाकर्ता की मांगों पर आगे विचार किया जा सकता है। मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने के कारण मौत के कारणों या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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