लखनऊ। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सतर्क हो गई है। कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को मची भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं। इस दर्दनाक हादसे को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को पंडालों की अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, प्रवेश एवं निकास द्वार तथा आपातकालीन निकासी मार्गों की जांच करने के लिए कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
कोलकाता में 19 मौतों के बाद यूपी सरकार सतर्क
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक भीड़ बढ़ने और अफरा-तफरी की स्थिति बनने से भगदड़ मच गई।
शुरुआती रिपोर्टों में भारी बारिश, संकरे रास्तों और भीड़ नियंत्रण की कमजोर व्यवस्था को हादसे से जुड़ी संभावित परिस्थितियों के रूप में बताया गया है।
घटना के बाद घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।
इस घटना से सबक लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक आयोजनों के दौरान संभावित खतरों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री योगी ने सभी जिलों के अधिकारियों को दिए निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा की विशेष समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित पूजा पंडालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच करें।
इसके साथ ही पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बनाए गए प्रवेश और निकास द्वारों का निरीक्षण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट लेने के बजाय स्वयं फील्ड में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखने को कहा है।
सरकार का उद्देश्य समय रहते संभावित कमियों की पहचान करना और दुर्घटनाओं को रोकना है।
प्रवेश और निकास द्वारों की होगी विशेष जांच
दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी पंडालों में बनाए गए एंट्री और एग्जिट पॉइंट का स्वयं निरीक्षण करें।
इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रद्धालुओं के आने और बाहर निकलने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।
पंडालों के प्रवेश और निकास मार्गों पर ऐसी कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, जिससे भीड़ अचानक रुक जाए।
विशेष रूप से बड़े पंडालों में भीड़ का दबाव बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की समीक्षा करने पर जोर दिया गया है।
इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुर्गा पूजा पंडालों में आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा है कि सभी पंडालों में पर्याप्त और चौड़े इमरजेंसी एग्जिट होने चाहिए।
आग लगने, भगदड़ या किसी अन्य आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ऐसे रास्ते बेहद जरूरी होते हैं।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जांच करें कि आपातकालीन निकास द्वार तक पहुंचने वाले रास्ते खुले और बाधामुक्त हैं या नहीं।
भीड़ वाले आयोजनों में आपातकालीन निकासी की उचित व्यवस्था गंभीर दुर्घटनाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है।
आग और शॉर्ट सर्किट रोकने के लिए बिजली व्यवस्था की जांच
दुर्गा पूजा पंडालों में सजावट, रोशनी और अन्य विद्युत उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
ऐसे में बिजली के तारों, कनेक्शन और उपकरणों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी पूजा पंडालों में विद्युत सुरक्षा की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
इसका उद्देश्य शॉर्ट सर्किट और बिजली संबंधी अन्य दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है।
पंडालों में इस्तेमाल किए जा रहे विद्युत उपकरणों और वायरिंग की स्थिति की समीक्षा करने के साथ आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
अग्निशमन व्यवस्था की जांच भी इसी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
वाराणसी के पूजा पंडालों में पुलिस की विशेष तैनाती
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बीच वाराणसी में दुर्गा पूजा पंडालों और मंदिरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
वाराणसी की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नमिता श्रीवास्तव ने बताया कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शहर के पूजा पंडालों और मंदिरों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
इनमें महिला पुलिसकर्मियों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
महिलाओं की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को किया जा रहा जागरूक
उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत नवरात्रि के दौरान महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
वाराणसी में पुलिसकर्मी महिलाओं को उनकी सुरक्षा से संबंधित सुविधाओं, सरकारी योजनाओं और साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दे रहे हैं।
इसके साथ ही महिलाओं को जरूरत पड़ने पर पुलिस से सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाली महिलाओं और युवतियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
पूजा समितियों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण
दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस और प्रशासन तक सीमित नहीं होती। आयोजन समितियों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, प्रवेश और निकास मार्गों की क्षमता तथा भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर आयोजकों को ध्यान देना चाहिए।
इसके अलावा स्वयंसेवकों की तैनाती, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए पूर्व तैयारी आवश्यक है।
भीड़ बढ़ने पर प्रवेश को नियंत्रित करना और स्पष्ट दिशा-निर्देश देना भी दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकता है।
सुरक्षा में लापरवाही रोकने पर सरकार का जोर
कोलकाता की दर्दनाक घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को लगातार निगरानी करने और सुरक्षा संबंधी कमियों को समय रहते दूर कराने के निर्देश दिए हैं।
अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, प्रवेश और निकास द्वारों के साथ आपातकालीन रास्तों की जांच को प्राथमिकता दी गई है।
फिलहाल इन निर्देशों के तहत प्रदेश में कितने पंडालों का निरीक्षण पूरा हुआ है या कितनी अनियमितताएं मिली हैं, इसका राज्यव्यापी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में दुर्गा पूजा का पर्व मना सकें और कोलकाता जैसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।