लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पदयात्राएं निकालने जा रही है। पार्टी ने इस अभियान को 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' नाम दिया है। तीन नवंबर से पांच नवंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी तथा दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। इस अभियान के जरिए भाजपा विपक्ष के कथित 'रिजीम चेंज' एजेंडे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।
भाजपा ने इस अभियान को उत्तर प्रदेश में बड़े राजनीतिक जनसंपर्क कार्यक्रम के रूप में तैयार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रदेश संगठन के पदाधिकारी, सांसद, विधायक, विभिन्न मोर्चों के कार्यकर्ता और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि भी पदयात्राओं में शामिल होंगे। पार्टी की योजना इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक सीधे पहुंचने और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर अपना पक्ष रखने की है।
प्रदेश भाजपा महामंत्री एवं अभियान प्रभारी दिलीप पटेल के अनुसार, राज्य के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राओं की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। अवध, ब्रज, गोरखपुर, काशी, कानपुर-बुंदेलखंड और पश्चिम क्षेत्र में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अभियान की शुरुआत मंगलवार, तीन नवंबर को लखनऊ और बरेली से होगी। राजधानी लखनऊ में अवध क्षेत्र की पदयात्रा निकाली जाएगी। इसका नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह करेंगे। पार्टी ने इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को शामिल करने की तैयारी की है।
इसी दिन बरेली में ब्रज क्षेत्र की पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी प्रमुख रूप से शामिल होंगे। सहयोगी दल के नेता की भागीदारी को भाजपा और उसके सहयोगियों के संयुक्त राजनीतिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
चार नवंबर को अभियान के दूसरे दिन गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर में बड़ी पदयात्राएं आयोजित होंगी। गोरखपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के शामिल होने का कार्यक्रम है। इस पदयात्रा को पूर्वांचल में पार्टी के महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, काशी क्षेत्र के अंतर्गत प्रयागराज में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की पदयात्रा कानपुर में आयोजित होगी, जिसमें उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित स्थानीय सांसद, विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
अभियान का समापन पांच नवंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में होगा। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए इस कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
भाजपा ने इन पदयात्राओं में बड़ी जनभागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यक्रम में कम से कम 25 हजार लोगों को जुटाने की तैयारी कर रही है। पदयात्राओं के दौरान कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता निर्धारित मार्गों पर पैदल चलकर आम नागरिकों से संपर्क करेंगे।
इस अभियान के पीछे भाजपा की प्रमुख रणनीति विपक्ष की ओर से लोकतंत्र, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवालों का राजनीतिक जवाब देना है। विपक्षी दलों ने हाल के दिनों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की आलोचना तेज की है।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। हालांकि, विपक्ष इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े अपने सवालों को जायज बताता रहा है।
भाजपा इस अभियान में विपक्ष के कथित 'रिजीम चेंज' एजेंडे को भी प्रमुख मुद्दा बनाएगी। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने के उद्देश्य से राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार की आलोचना करना और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है।
पदयात्राओं के अतिरिक्त भाजपा ने प्रदेश में लगभग 200 युवा सम्मेलनों और किसानों के साथ सामुदायिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई है। इनके माध्यम से युवाओं, किसानों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित अपना पक्ष समझाने के लिए प्रचार सामग्री का भी इस्तेमाल करेगी।
राजनीतिक दृष्टि से यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा समय रहते अपने संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, छह संगठनात्मक क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के साथ पदयात्राएं आयोजित करने का उद्देश्य केवल विपक्ष को जवाब देना नहीं, बल्कि आगामी चुनाव के लिए संगठन की तैयारियों को परखना भी है। इससे पार्टी को क्षेत्रीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनसमर्थन का आकलन करने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल तीन से पांच नवंबर तक चलने वाला यह अभियान उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अब देखना होगा कि भाजपा की इन पदयात्राओं से प्रदेश के राजनीतिक माहौल पर कितना असर पड़ता है।