धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर में नकली दूध तैयार करने का बड़ा मामला सामने आया है। यहां कथित तौर पर पाम ऑयल और पाउडर का इस्तेमाल कर दूध तैयार किया जा रहा था और इसकी सप्लाई तीन राज्यों तक की जा रही थी। मामला सामने आने के बाद दूध की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक नकली दूध तैयार करने के लिए असली दूध की जगह अलग-अलग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें पाम ऑयल और पाउडर प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इन चीजों को मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार किया जाता था, जो देखने में सामान्य दूध जैसा लगे। इसके बाद इसे बाजार में सप्लाई कर दिया जाता था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नकली दूध की सप्लाई केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं थी। इसे तीन राज्यों तक पहुंचाया जा रहा था। इससे आशंका है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक मिलावटी दूध पहुंचा होगा। अब पूरे नेटवर्क और सप्लाई से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
दूध रोजमर्रा की जरूरत का महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में दूध में मिलावट का मामला सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा हुआ है। नकली दूध तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी गुणवत्ता की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता था।
मामला उजागर होने के बाद इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि नकली दूध किस तरह तैयार किया जाता था और इसे बाजार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था क्या थी। इतनी बड़ी मात्रा में तीन राज्यों तक सप्लाई के लिए परिवहन और वितरण का नेटवर्क होना भी जरूरी है। ऐसे में जांच के दायरे में सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोग भी आ सकते हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच और नमूने लेने की व्यवस्था होती है। दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनकी खपत काफी ज्यादा होती है। त्योहारों और अधिक मांग वाले दिनों में दूध तथा दुग्ध उत्पादों की खपत बढ़ने के साथ मिलावट का खतरा भी बढ़ सकता है।
पाम ऑयल और पाउडर से तैयार किए जा रहे कथित नकली दूध का मामला सामने आने के बाद यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि इसे सामान्य दूध के रूप में किस कीमत पर बेचा जा रहा था। इसके अलावा किन-किन इलाकों और बाजारों में इसकी सप्लाई की गई, इसका पता चलने से पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकेगी।
नकली दूध की पहचान आम उपभोक्ता के लिए हमेशा आसान नहीं होती। रंग और बनावट सामान्य दूध जैसी होने के कारण कई बार मिलावट का पता प्रयोगशाला जांच में ही चलता है। यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में नमूनों की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मामले में भी बरामद सामग्री और दूध के नमूनों की जांच से कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि तैयार किए जा रहे दूध में किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया और वह निर्धारित खाद्य मानकों पर कितना खरा उतरता था।
धौलपुर में सामने आया यह मामला केवल स्थानीय स्तर की मिलावट तक सीमित नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इसकी सप्लाई तीन राज्यों तक होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और कितने लोगों तथा ठिकानों का पता चलता है। फिलहाल पाम ऑयल और पाउडर से नकली दूध तैयार करने का कथित खेल उजागर होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। तीन राज्यों तक इसकी सप्लाई की बात सामने आने से मिलावट के इस नेटवर्क का दायरा बड़ा माना जा रहा है।
Tags: