लखनऊ। लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित इटौंजा टोल प्लाजा पर एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। टोल प्लाजा से जब्त किए गए सर्वर, डीवीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी फास्टैग और संदिग्ध वाहन नंबरों के जरिए प्रतिदिन कितने वाहन टोल प्लाजा से गुजरे और उनसे हुई टोल वसूली की रकम आखिर किस बैंक खाते में पहुंची।

जांच एजेंसी ने टोल प्लाजा के पिछले तीन साल के सर्वर डाटा को भी जांच के दायरे में लिया है। इसके जरिए टोल से गुजरने वाले वाहनों, फास्टैग भुगतान और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। एसटीएफ ने टोल प्रबंधक को भी नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है।

मंगलवार दोपहर करीब दो बजे एसटीएफ की कार्रवाई शुरू होने के बाद से टोल प्लाजा की सामान्य वसूली व्यवस्था प्रभावित बताई जा रही है। सर्वर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण सीज किए जाने के कारण टोल संचालन पर असर पड़ा है।

सर्वर और DVR समेत कई उपकरण सीज

एसटीएफ ने कार्रवाई के दौरान इटौंजा टोल प्लाजा से मुख्य सर्वर, डीवीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन उपकरणों में टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों और फास्टैग के जरिए हुए लेनदेन से जुड़ा महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड होने की संभावना है।

फोरेंसिक जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि सर्वर में मौजूद डाटा में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी या नहीं। इसके साथ ही डिलीट किए गए या छिपाए गए रिकॉर्ड को रिकवर करने का प्रयास भी किया जा सकता है।

डीवीआर की जांच से टोल प्लाजा पर आने-जाने वाले वाहनों की गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है। सर्वर डाटा और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग का मिलान कर जांच एजेंसी संदिग्ध लेनदेन की वास्तविक स्थिति तक पहुंचने का प्रयास करेगी।

तीन साल के डाटा की होगी जांच

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू टोल प्लाजा का पिछले तीन साल का सर्वर डाटा माना जा रहा है। एसटीएफ इस अवधि के रिकॉर्ड की जांच कर यह जानने की कोशिश करेगी कि संदिग्ध फास्टैग या वाहन नंबरों का इस्तेमाल कब से हो रहा था और इनके जरिए कितने वाहनों को टोल से निकाला गया।

यदि एक ही फास्टैग या संदिग्ध नंबर का इस्तेमाल कई वाहनों के लिए किया गया है तो डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण से इसका पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा नियमित फास्टैग लेनदेन और संदिग्ध ट्रांजेक्शन के बीच अंतर भी जांच का हिस्सा रहेगा।

तीन वर्षों के डाटा की जांच बड़ी प्रक्रिया हो सकती है, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में वाहनों के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का मिलान करना होगा।

बैंक खातों तक पहुंचेगी जांच

एसटीएफ की जांच केवल वाहनों के आवागमन तक सीमित नहीं है। फास्टैग से हुए भुगतान की रकम किन बैंक खातों में गई, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

एसटीएफ ने सर्वर से फास्टैग के जरिए हुए लेनदेन का बैंकवार विवरण सुरक्षित किया है। अब इस रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित बैंक खातों और टोल वसूली का मिलान किया जाएगा।

इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों से वसूली गई पूरी रकम निर्धारित खाते में पहुंची या किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हुई। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी वित्तीय अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

फर्जी फास्टैग के इस्तेमाल की पड़ताल

एसटीएफ का फोकस कथित फर्जी फास्टैग और संदिग्ध वाहन नंबरों के इस्तेमाल पर है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि प्रतिदिन कितने वाहन ऐसे फास्टैग या नंबरों के माध्यम से टोल प्लाजा पार करते थे।

फास्टैग से जुड़ा प्रत्येक भुगतान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करता है। ऐसे में सर्वर और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि किसी एक फास्टैग का इस्तेमाल असामान्य तरीके से अलग-अलग वाहनों के लिए किया गया या नहीं। यदि रिकॉर्ड में इस तरह का कोई पैटर्न सामने आता है तो उसके आधार पर संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

टोल प्रबंधक को पूछताछ के लिए नोटिस

एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा के प्रबंधक को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी टोल संचालन, सर्वर के रखरखाव, फास्टैग लेनदेन और पिछले रिकॉर्ड के संबंध में जानकारी जुटाएगी।

एसटीएफ के मुताबिक टोल प्रबंधक से करीब एक महीने से संबंधित डाटा मांगा जा रहा था। अब कार्रवाई के बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

पूछताछ के दौरान यह जानने का प्रयास किया जा सकता है कि सर्वर डाटा की निगरानी किसके जिम्मे थी, फास्टैग भुगतान का हिसाब किस स्तर पर रखा जाता था और संदिग्ध गतिविधियों के बारे में प्रबंधन को कोई जानकारी थी या नहीं।

टोल वसूली पर पड़ा असर

मंगलवार दोपहर करीब दो बजे एसटीएफ की कार्रवाई के बाद टोल प्लाजा की वसूली व्यवस्था प्रभावित हुई है। सर्वर और संबंधित उपकरण सीज किए जाने के कारण सामान्य तकनीकी व्यवस्था पर असर पड़ा।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण इटौंजा टोल प्लाजा से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में टोल वसूली व्यवस्था प्रभावित होने का असर वहां से गुजरने वाले वाहनों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि आगे टोल संचालन को सामान्य बनाने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।

फोरेंसिक रिपोर्ट से खुल सकते हैं अहम तथ्य

इस पूरे मामले में जब्त डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकता है कि सर्वर में किस तरह का डाटा मौजूद था, क्या किसी रिकॉर्ड में बदलाव या छेड़छाड़ हुई और फास्टैग लेनदेन का वास्तविक स्वरूप क्या था।

एसटीएफ सर्वर, डीवीआर, बैंकवार लेनदेन और वाहन रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही है। तीन साल के डाटा की जांच पूरी होने के बाद ही कथित अनियमितताओं के वास्तविक पैमाने की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल जांच जारी है और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या कथित वित्तीय गड़बड़ी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। एसटीएफ की पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।

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