ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित उन किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने का निर्णय लिया गया, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया था। इसके अलावा ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में निर्धारित धनराशि पर लगने वाले ब्याज को माफ करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन के पास भेजने का भी फैसला किया गया है। इन निर्णयों से लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
145वीं बोर्ड बैठक में किसानों के हित में बड़े फैसले
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में किसानों की समस्याओं, भूमि अधिग्रहण, ग्रामीण आबादी के मामलों और मुआवजा वितरण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार ने की। इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।बोर्ड ने विशेष रूप से उन किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया, जिनकी जमीन वर्षों पहले विकास परियोजनाओं के लिए ली गई थी, लेकिन उन्हें अतिरिक्त मुआवजे का लाभ नहीं मिल सका था।प्राधिकरण ने ऐसे मामलों में पात्रता के आधार पर लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया।
2002 से 2013 के बीच जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा लाभ
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर देने से जुड़ा रहा।दरअसल, इस अवधि के दौरान कई किसानों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी। कुछ किसानों को अतिरिक्त मुआवजे का लाभ मिल गया था, जबकि अन्य किसान विभिन्न कारणों से इससे वंचित रह गए थे।
ऐसे किसानों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें भी समान आधार पर अतिरिक्त प्रतिकर दिया जाए।प्राधिकरण ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में रखा गया, जहां इसे मंजूरी दे दी गई।इस निर्णय के बाद पात्र किसानों को उनकी मूल मुआवजा राशि के आधार पर अतिरिक्त 64.7 प्रतिशत प्रतिकर मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
हजारों किसानों को मिल सकता है आर्थिक फायदा
इस फैसले से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलने की संभावना है।इससे पहले अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, करीब 4,500 किसानों के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त मुआवजे की संभावना जताई गई थी।हालांकि, वास्तविक लाभार्थियों की संख्या और भुगतान की अंतिम राशि संबंधित किसानों की पात्रता तथा अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।प्राधिकरण को प्रत्येक किसान के भूमि अधिग्रहण संबंधी दस्तावेज, पहले प्राप्त मुआवजे और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना होगा।इसलिए सभी किसानों को एक समान राशि नहीं मिलेगी। अतिरिक्त प्रतिकर की गणना उनकी मूल प्रतिकर राशि के आधार पर होगी।
लीज बैक की धनराशि पर ब्याज माफी का प्रस्ताव
बोर्ड बैठक में ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक से संबंधित मामलों पर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, किसानों को लीज बैक के लिए निर्धारित धनराशि तय समय पर जमा करनी होती है।तीन महीने से अधिक की देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज लगाया जाता है। वहीं, एक वर्ष के भीतर भुगतान नहीं होने पर पट्टा निरस्त करने का प्रावधान है।किसान लंबे समय से ब्याज माफ करने की मांग कर रहे थे।इन मांगों को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण बोर्ड ने ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन का प्रस्ताव शासन के पास भेजने का निर्णय लिया है।हालांकि, ब्याज माफी अभी लागू नहीं हुई है। इसके लिए शासन की मंजूरी आवश्यक होगी।
लीज बैक की प्रक्रिया में भी होगा बदलाव
प्राधिकरण ने ग्रामीण आबादी के लीज बैक मामलों में नई प्रक्रिया अपनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।इसके तहत पहले संबंधित किसानों के हिस्से का निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद उनके पक्ष में लीज डीड संपन्न कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।यह व्यवस्था 24 अप्रैल 2010 के शासनादेश, ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली 2011 तथा वर्ष 2015 में हुए संशोधनों के प्रावधानों के आधार पर लागू की जाएगी।इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसानों के भूमि संबंधी मामलों में कानूनी अड़चनों को कम करना और लंबित प्रकरणों के समाधान को आसान बनाना है।
आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों को भी सुविधाएं
बोर्ड बैठक में उन किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण फैसला हुआ, जो अपनी जमीन आपसी सहमति से प्राधिकरण को देते हैं।प्राधिकरण ने ऐसे किसानों को भी भूमि अधिग्रहण के समान सुविधाएं प्रदान करने का निर्णय लिया है।इससे पहले 27 अगस्त 2026 को हुई बोर्ड बैठक में भूमि खरीद के लिए दो विकल्प निर्धारित किए गए थे।पहले विकल्प में जमीन की दर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर और दूसरे विकल्प में 5,725 रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई थी।प्रस्ताव के अनुसार, 5,725 रुपये प्रति वर्गमीटर वाला विकल्प चुनने वाले किसानों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा।वहीं, 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर चुनने वाले किसानों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड नहीं दिया जाएगा।यह व्यवस्था किसानों को अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर विकल्प चुनने का अवसर देगी।
वर्षों से अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे थे किसान
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और अतिरिक्त मुआवजा लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।किसानों की मांग रही है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले सभी पात्र किसानों को उचित प्रतिकर और निर्धारित सुविधाएं मिलनी चाहिए।अतिरिक्त मुआवजे के मामलों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गजराज एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य संबंधी फैसले का भी उल्लेख किया जाता रहा है।प्राधिकरण ने शासन को भेजे अपने प्रस्ताव में इस मामले का हवाला देते हुए वंचित किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर देने का अनुरोध किया था।शासन ने प्राधिकरण को लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेने की अनुमति दी थी। इसके बाद बोर्ड की मंजूरी को किसानों की लंबित मांगों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बोर्ड बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आरके सिंह मौजूद रहे।इसके अलावा एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, श्रीलक्ष्मी वीएस, प्रेरणा सिंह और सुमित यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।बैठक में वित्त, परियोजना और प्रशासनिक विभागों से जुड़े अधिकारियों ने संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा की।
अब किसानों को भुगतान प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार
बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब किसानों की नजर अतिरिक्त मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया पर टिकी है।प्राधिकरण को पात्र किसानों की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और भुगतान संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।वहीं, लीज बैक की धनराशि पर ब्याज माफी के प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति मिलने के बाद ही संबंधित किसानों को उसका लाभ मिल सकेगा।
Tags: