मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चीनी की बढ़ती खुदरा कीमतों पर नियंत्रण लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने शनिवार, 17 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में चीनी मिलों के अध्यासी और यूनिट हेड के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार चीनी मिलें केवल पोर्टल पर पंजीकृत थोक विक्रेताओं को ही सीधे चीनी उपलब्ध कराएं। चीनी की आपूर्ति में एजेंट और ब्रोकर की भूमिका समाप्त करने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने, पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद चीनी की आपूर्ति रोकने या नियमों की अनदेखी करने वाली मिलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एडीएम प्रशासन विजय वर्धन तोमर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

चीनी की बढ़ती कीमतों पर प्रशासन गंभीर

मेरठ में चीनी के फुटकर मूल्यों में वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाजार की स्थिति की समीक्षा शुरू की है।

इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने कलेक्ट्रेट में चीनी मिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बाजार में अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण लगाना था।

जिलाधिकारी ने कहा कि चीनी आम लोगों की दैनिक जरूरतों में शामिल है। ऐसे में इसकी आपूर्ति प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने मिल प्रबंधन से शासन के निर्देशों का पालन करते हुए बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने को कहा।

सीधे थोक विक्रेताओं को चीनी देने के निर्देश

जिलाधिकारी ने चीनी मिलों को निर्देशित किया कि वे पोर्टल पर पंजीकृत थोक विक्रेताओं को सीधे चीनी की आपूर्ति करें।

उन्होंने कहा कि चीनी वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि वास्तविक व्यापारियों को निर्धारित व्यवस्था के तहत माल मिल सके।

डीएम ने स्पष्ट किया कि आपूर्ति में अनावश्यक देरी या मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।

थोक विक्रेताओं को सीधे चीनी मिलने से आपूर्ति प्रक्रिया में अतिरिक्त बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिल सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और अनावश्यक मूल्य वृद्धि को रोकना है।

एजेंट और ब्रोकर प्रथा समाप्त करने पर जोर

बैठक में जिलाधिकारी ने चीनी मिलों को एजेंट और ब्रोकर के माध्यम से होने वाली आपूर्ति व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पंजीकृत थोक विक्रेताओं को सीधे मिलों से चीनी उपलब्ध कराई जाए।

प्रशासन का मानना है कि आपूर्ति के बीच अनावश्यक मध्यस्थ होने से मूल्य निर्धारण और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

ऐसी स्थिति में थोक व्यापारियों को चीनी प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है और इसका असर खुदरा बाजार पर पड़ सकता है।

जिलाधिकारी ने मिल प्रबंधन को निर्देशित किया कि वे शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए सीधे आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर होगी कार्रवाई

डीएम डॉ. वीके सिंह ने चेतावनी दी कि बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मिल के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसके बावजूद पंजीकृत थोक विक्रेताओं को चीनी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो संबंधित मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की जा सकती है।

ऐसी शिकायतों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए चीनी की उपलब्धता बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को भी आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए।

कोल्हू संचालकों को चीनी बिक्री पर रोक के निर्देश

बैठक में चीनी मिलों द्वारा कोल्हू संचालकों को चीनी बेचे जाने का मुद्दा भी उठाया गया।

जिलाधिकारी ने मिल प्रबंधन को निर्देश दिए कि वे कोल्हू संचालकों को चीनी की बिक्री न करें और शासन द्वारा निर्धारित आपूर्ति व्यवस्था का पालन करें।

इसके साथ ही मेरठ और प्रदेश के अन्य जिलों के पंजीकृत थोक विक्रेताओं को आपूर्ति में प्राथमिकता देने को कहा गया।

प्रशासन का उद्देश्य चीनी के वितरण को व्यवस्थित रखना और खुदरा बाजार तक पर्याप्त मात्रा में चीनी पहुंचाना है।

चीनी डीलरों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने की सलाह

जिलाधिकारी ने बैठक में चीनी डीलरों और थोक विक्रेताओं के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

उन्होंने कहा कि जो व्यापारी सीधे चीनी मिलों से माल प्राप्त करना चाहते हैं, वे संबंधित पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।

पंजीकरण के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मिलों से सीधे चीनी खरीदी जा सकेगी।

इससे आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और लेनदेन की निगरानी में मदद मिल सकती है।

डीएम ने व्यापारियों से कहा कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और चीनी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन के संज्ञान में लाएं।

पर्याप्त स्टॉक होने पर भी चीनी नहीं मिली तो करें शिकायत

बैठक में जिलाधिकारी ने थोक व्यापारियों से कहा कि वे आपूर्ति संबंधी समस्याओं को छिपाएं नहीं।

यदि किसी चीनी मिल के पास पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन पंजीकृत व्यापारी को चीनी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, तो इसकी शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में की जा सकती है।

इससे प्रशासन को आपूर्ति संबंधी अनियमितताओं का पता लगाने में सहायता मिलेगी।

डीएम ने स्पष्ट किया कि चीनी की उपलब्धता प्रभावित करने वाली गतिविधियों में किसी प्रकार की मिलीभगत पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, बैठक के दौरान किसी विशेष मिल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने या जुर्माना लगाने की पुष्टि नहीं हुई है।

त्योहारों के दौरान चीनी की मांग महत्वपूर्ण

त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ना सामान्य बात है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में चीनी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।

ऐसे समय में बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

यदि आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसका असर छोटे व्यापारियों, मिठाई विक्रेताओं और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

इसी कारण प्रशासन ने चीनी की वितरण प्रणाली को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया है।

हालांकि, मेरठ में चीनी के मौजूदा खुदरा मूल्य या बीते दिनों हुई वृद्धि के सटीक आंकड़े बैठक संबंधी उपलब्ध विवरण में नहीं बताए गए हैं।

इसलिए कीमतों में कितनी कमी आएगी, इसका अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।

केंद्र सरकार भी चीनी के स्टॉक की कर रही निगरानी

चीनी की उपलब्धता और बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर भी स्टॉक संबंधी व्यवस्थाएं लागू हैं।

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2026 के लिए चीनी मिलों की स्टॉक रखने की सीमा से संबंधित आदेश जारी किया गया है।

चीनी डीलरों के स्टॉक संबंधी नियमों में भी संशोधन किए गए हैं।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चीनी के भंडारण और आपूर्ति की निगरानी करना है, ताकि बाजार में अनावश्यक कमी और कीमतों में असामान्य वृद्धि की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एडीएम प्रशासन विजय वर्धन तोमर, एडीएम भूमि अध्याप्ति नवीन चंद्र और नगर मजिस्ट्रेट पंकज दीक्षित उपस्थित रहे।

इसके अलावा जिला पूर्ति अधिकारी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, जीएसटी विभाग के अधिकारी, सहायक चीनी आयुक्त, गन्ना निरीक्षक और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

बैठक में मिल प्रबंधन और संबंधित विभागों को शासन के निर्देशों का पालन करने तथा आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा गया।

उपभोक्ताओं को राहत दिलाने पर प्रशासन का जोर

मेरठ जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को चीनी की बढ़ती कीमतों से राहत दिलाना है।

जिलाधिकारी ने चीनी मिलों को स्पष्ट संदेश दिया है कि आपूर्ति व्यवस्था में मनमानी, अनावश्यक मध्यस्थता और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

पंजीकृत थोक विक्रेताओं को सीधे चीनी उपलब्ध कराने और शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने के निर्देशों से बाजार की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

अब देखना होगा कि प्रशासन के इन निर्देशों के बाद चीनी की आपूर्ति और खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

Tags: