मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ कस्बे में शनिवार को एक पुरानी और जर्जर इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। मोहल्ला बुध बाजार में स्थित इस इमारत में सुबह दरारें दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी थी। पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए आसपास की दुकानों को बंद करा दिया और लोगों को इमारत से दूर हटा दिया। कुछ देर बाद ही इमारत तेज आवाज के साथ ढह गई। समय रहते उठाए गए कदमों के कारण किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
इमारत में दरार देखकर घबराए लोग
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह इमारत वर्षों से जर्जर अवस्था में खड़ी थी। इसके चारों तरफ आवासीय मकान और दुकानें बनी हुई हैं। शनिवार सुबह लोगों ने इमारत की दीवारों में नई दरारें देखीं। इससे आसपास रहने वालों में हड़कंप मच गया। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए लोगों ने तत्काल पुलिस को जानकारी दी।
सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा की दृष्टि से इमारत के आसपास का क्षेत्र खाली कराना शुरू कर दिया। नजदीक स्थित दुकानों को बंद कराया गया और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की हिदायत दी गई। पुलिस ने स्थिति की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी।
अधिकारियों के पहुंचते ही भरभराकर गिरी इमारत
घटना की सूचना पर जानसठ की एसडीएम रश्मि लांबा मौके पर पहुंचीं। नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. आबिद हुसैन और नगर पंचायत के कर्मचारी भी वहां पहुंच गए। अधिकारी जर्जर इमारत को सुरक्षित तरीके से गिराने या आसपास के भवनों की सुरक्षा के संबंध में योजना बना ही रहे थे कि अचानक उसका एक हिस्सा दरकने लगा।
कुछ ही पलों में पूरी इमारत तेज आवाज के साथ ढह गई। मलबा गिरने से क्षेत्र में धूल का गुबार छा गया। प्रशासन ने आसपास मौजूद लोगों को पीछे हटाया और घटनास्थल की घेराबंदी कर दी। अधिकारियों की सतर्कता और पहले से दुकानों को बंद करा दिए जाने के कारण बड़ा हादसा टल गया।
स्थानीय लोगों ने इमारत को बताया ऐतिहासिक
जानसठ निवासी समीर हसन ने दावा किया कि इस इमारत का निर्माण सैयद उमर अली खान ने कराया था। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस प्रवेश द्वार के चारों तरफ कभी एक महल हुआ करता था। उन्होंने इसका निर्माण काल वर्ष 1208 के आसपास बताया। हालांकि, इमारत की आयु और उससे जुड़े इतिहास की प्रशासन या पुरातत्व विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
समीर हसन के मुताबिक, सैयद उमर अली खान दिल्ली सल्तनत के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के दरबार में वजीर थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दौर में गंगा और यमुना के बीच के क्षेत्र को सूबा-ए-दोआब कहा जाता था और उमर अली खान यहां के गवर्नर थे। उनकी छावनी ढासरी गांव में होने की बात भी स्थानीय स्तर पर कही जाती है।
आसपास के मकानों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इमारत गिरने के बाद नगर पंचायत और प्रशासन के सामने मलबा हटाने के साथ आसपास बने मकानों की स्थिति की जांच करना भी महत्वपूर्ण हो गया है। पुरानी इमारत के गिरने से निकटवर्ती भवनों की दीवारों या नींव पर प्रभाव पड़ा है या नहीं, इसका तकनीकी निरीक्षण कराया जाना आवश्यक माना जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने क्षेत्र में मौजूद अन्य जर्जर भवनों का सर्वे कराने की मांग की है।
इस घटना ने आबादी के बीच स्थित पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों को समय रहते चिह्नित कर उनके मालिकों को मरम्मत अथवा सुरक्षित ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए जाने चाहिए। प्रशासन की तत्परता से शनिवार को जनहानि टल गई, लेकिन घटना ने भविष्य के लिए प्रभावी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता उजागर कर दी है।