मुजफ्फरनगर : सावन माह में हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे शिवभक्तों की आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। कांवड़ यात्रा के दौरान देशभर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। इसी आस्था और विश्वास के बीच दिल्ली के तिलक नगर निवासी पति-पत्नी शिवम और शैफाली की कांवड़ यात्रा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों ने मिलकर भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा और जीवनसाथी के प्रति अपने समर्पण की मिसाल पेश की है।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रहे शिवम और शैफाली मंगलवार को मुजफ्फरनगर पहुंचे। यहां उन्होंने शहर के ऐतिहासिक शिव चौक पर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। दोनों ने कांवड़ की परिक्रमा कर बाबा भोलेनाथ से आशीर्वाद लिया और इसके बाद अपनी आगे की यात्रा शुरू की। उनका लक्ष्य दिल्ली के तिलक नगर स्थित शिवालय में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना है।
शिवम ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक संकल्प पूरा करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उनकी पत्नी शैफाली गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं। बीमारी के दौरान परिवार काफी चिंतित था। उस कठिन समय में उन्होंने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की थी कि यदि उनकी पत्नी जल्द स्वस्थ हो जाएंगी तो वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आएंगे और भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
शिवम ने बताया कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से उनकी पत्नी के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी मनोकामना पूरी होने पर इस वर्ष कांवड़ यात्रा करने का निर्णय लिया। खास बात यह रही कि उन्होंने अकेले यात्रा करने के बजाय अपनी पत्नी शैफाली को भी साथ लेकर इस धार्मिक यात्रा को पूरा करने का फैसला किया।
पति-पत्नी का कहना है कि कांवड़ यात्रा उनके लिए श्रद्धा, विश्वास और भगवान शिव के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्हें काफी आध्यात्मिक अनुभव हो रहा है। रास्ते में मिलने वाले शिवभक्तों का उत्साह और सेवा भाव उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
मुजफ्फरनगर का शिव चौक हर साल कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां पहुंचने वाले लाखों शिवभक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। शिवम और शैफाली ने भी इसी परंपरा के तहत शिव चौक पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया।
स्थानीय लोगों ने भी इस दंपती की श्रद्धा और समर्पण की सराहना की। लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह विश्वास, धैर्य और परिवार के प्रति प्रेम को भी दर्शाती है। शिवम और शैफाली की यात्रा ने यह संदेश दिया है कि सच्ची आस्था और मजबूत संकल्प के साथ कोई भी कठिन रास्ता आसान हो सकता है।
सावन महीने में शिवभक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों तक कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है। प्रशासन भी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए लगातार व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है।
शिवम और शैफाली अब अपनी यात्रा पूरी कर दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वह भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना पूरी होने पर बाबा भोलेनाथ का धन्यवाद करेंगे। उनकी यह कांवड़ यात्रा आस्था के साथ-साथ पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास और साथ निभाने की प्रेरणादायक कहानी बन गई है।